ट्विशा शर्मा मौत केस में बड़ा मोड़! AIIMS में दोबारा पोस्टमार्टम… अब खुलेंगे मौत के सबसे बड़े राज?
हाईकोर्ट के आदेश के बाद मचा हड़कंप, सुप्रीम कोर्ट ने भी लिया स्वतः संज्ञान; पति और पूर्व जज सास पर पहले से गंभीर आरोप

भोपाल। अभिनेत्री और मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अब बेहद सनसनीखेज और संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के बाद रविवार को भोपाल AIIMS में ट्विशा का दोबारा पोस्टमार्टम शुरू किया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब अब दूसरी मेडिकल जांच से मिलने की उम्मीद है।
दिल्ली AIIMS से आई विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम इस बार मौत के हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, डॉक्टरों का फोकस शरीर पर मिले निशानों, मौत के समय की परिस्थितियों और घटनास्थल से जुड़े उन तथ्यों पर है, जिन्हें पहले नजरअंदाज किए जाने के आरोप लगे थे।
ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित अपने ससुराल में फांसी पर लटकी मिली थीं। शुरुआत से ही परिवार ने इस मौत को संदिग्ध बताया था। परिजनों का आरोप है कि ट्विशा को दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता था और उसे मानसिक रूप से लगातार परेशान किया जा रहा था।
मामले में ट्विशा के पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ पहले ही FIR दर्ज हो चुकी है। समर्थ पेशे से वकील हैं, जबकि उनकी मां गिरिबाला सिंह पूर्व जिला न्यायाधीश रह चुकी हैं। यही वजह है कि इस केस में “प्रभाव” और “संस्थागत पक्षपात” जैसे सवाल भी उठने लगे हैं।
परिवार का कहना है कि शुरुआती जांच में कई गंभीर बिंदुओं को दबाने की कोशिश हुई। इसी वजह से उन्होंने हाईकोर्ट में दोबारा पोस्टमार्टम और स्वतंत्र जांच की मांग की थी। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नया पोस्टमार्टम कराने का आदेश दिया।
ट्विशा के भाई हर्षित शर्मा ने कहा कि परिवार अब सिर्फ सच सामने आने का इंतजार कर रहा है। दूसरी ओर परिवार के वकील अंकुर पांडे का दावा है कि दूसरे पोस्टमार्टम से कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।
इस केस ने तब और बड़ा मोड़ ले लिया, जब सुप्रीम कोर्ट ने भी स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर लिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ 25 मई को इस मामले की सुनवाई करेगी।
सुप्रीम कोर्ट में दर्ज केस के शीर्षक में ही “संदिग्ध मौत” और “संस्थागत पक्षपात” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, जिसने पूरे मामले को और ज्यादा गंभीर बना दिया है।
उधर, मध्य प्रदेश सरकार ने इस केस में सीबीआई जांच की सिफारिश की है। ट्विशा के पिता ने इसके लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव का आभार जताया है और कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि उनकी बेटी को न्याय मिलेगा।
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपी समर्थ सिंह कथित तौर पर 10 दिनों तक फरार कैसे रहा और इस दौरान उसकी मदद किसने की। वहीं स्थानीय अदालत ने समर्थ सिंह को 7 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है, जहां उससे लगातार पूछताछ की जा रही है।
अब पूरे देश की नजर इस केस पर टिकी हुई है। सवाल सिर्फ ट्विशा शर्मा की मौत का नहीं, बल्कि उस सच का है जो शायद अब दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ बाहर आने वाला है।









