झारखंड : रांची में बिना नक्शे वाले मकान अब होंगे वैध…2.45 लाख भवन स्वामियों के लिए बड़ी खबर…सरकार ने लागू की नई नियमावली

Unapproved Houses in Ranchi to be Regularized Now... Big News for 2.45 Lakh Property Owners... Government Implements New Regulations.

रांची में लंबे समय से बिना नक्शा बने भवनों को लेकर चल रही समस्या पर अब राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। झारखंड सरकार ने झारखंड रेगुलराइजेशन ऑफ अनअथोराइज्ड कंस्ट्रक्टेड बिल्डिंग रूल्स 2026 को लागू कर दिया है।

इस नए नियम के तहत 31 दिसंबर 2024 से पहले बने बिना नक्शा वाले भवनों को नियमित किया जाएगा, जिससे हजारों भवन मालिकों को राहत मिलने की उम्मीद है।

रांची में अवैध निर्माण का बड़ा आंकड़ा, केवल 55 हजार भवन ही वैध
आंकड़ों के अनुसार रांची नगर निगम और आरआरडीए क्षेत्र में करीब 3 लाख भवन मौजूद हैं। इनमें से केवल 55 हजार भवनों का ही विधिवत नक्शा पास है।

बाकी लगभग 2.45 लाख भवन बिना नक्शा के बने हुए हैं, जिनमें अधिकतर एक से तीन मंजिला आवासीय निर्माण शामिल हैं।

किसे मिलेगा लाभ और किसे नहीं, साफ हुई स्थिति
विशेषज्ञों के अनुसार इस नियमावली का सीधा लाभ करीब 90 से 95 हजार भवन मालिकों को ही मिल सकेगा।

लगभग 1.45 लाख भवन ऐसे हैं जो या तो आदिवासी भूमि, विवादित जमीन या मास्टर प्लान के विपरीत बने हुए हैं। ऐसे भवनों को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।

इसका मतलब है कि केवल शर्तों के अनुरूप बने भवन ही नियमित किए जाएंगे।

सरकार को मिलेगा बड़ा राजस्व, 225 करोड़ रुपये की उम्मीद
इस नियमावली से सरकार को आर्थिक रूप से भी बड़ा फायदा होने की संभावना है।

अनुमान के अनुसार केवल पेनाल्टी से ही करीब 125 करोड़ रुपये की आय हो सकती है, जबकि नक्शा पासिंग फीस और लेबर सेस से 100 करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त आय मिलने का अनुमान है।

इस तरह कुल मिलाकर लगभग 225 करोड़ रुपये का राजस्व सरकारी खजाने में जा सकता है।

स्क्रो अकाउंट में जमा होगी पूरी राशि, विकास कार्यों पर होगा उपयोग
सरकार ने यह भी साफ किया है कि इस योजना से मिलने वाली पूरी राशि को अलग स्क्रो अकाउंट में रखा जाएगा।

इस फंड का उपयोग सीधे शहर के विकास कार्यों में किया जाएगा, जिसमें सड़क निर्माण, जल निकासी व्यवस्था, नाली सुधार और अन्य शहरी सुविधाओं को बेहतर बनाना शामिल है।

रांची के शहरी विकास में बड़ा बदलाव, हजारों परिवारों को राहत
यह नई व्यवस्था न केवल अवैध निर्माण की समस्या को नियंत्रित करने की दिशा में कदम है, बल्कि हजारों परिवारों के लिए राहत भी लेकर आई है।

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