झारखंड: राज्य सरकार का बड़ा फैसला, सड़क दुर्घटना में मृतकों की अनुग्रह राशि 1 लाख से बढ़कर अब 4 लाख, आपदा प्रबंधन में गोताखोरों की संख्या बढ़ायी जायेगी…

Jharkhand: State government's big decision, ex-gratia amount for road accident victims increased from Rs 1 lakh to Rs 4 lakh, number of divers in disaster management will be increased...

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में हुई राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की समीक्षा बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सड़क दुर्घटना में मृतकों के परिजनों को मिलने वाली सहायता राशि बढ़ाने, अनुग्रह अनुदान की प्रक्रिया सरल करने और आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
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रांची/29.4.26। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में राज्य में आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा कर निर्णय लिए गए। बैठक में आपदा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में सबसे अहम निर्णयों में से एक सड़क दुर्घटना में मृतकों के परिजनों को मिलने वाली अनुग्रह राशि में वृद्धि है। अब सड़क हादसे में जान गंवाने वाले व्यक्ति के आश्रितों को चार लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। इससे पहले यह राशि केवल एक लाख रुपये थी। इस फैसले को आम लोगों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।

इसके साथ ही, विभिन्न प्रकार की स्थानीय आपदाओं में मृत व्यक्तियों के आश्रितों को मिलने वाले अनुग्रह अनुदान की प्रक्रिया को सरल बनाने का निर्णय लिया गया। अब मृतक के परिजनों को अपने गृह जिले के उपायुक्त से घटना का सत्यापन कराकर अनुग्रह राशि प्राप्त हो सकेगी। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और जरूरतमंदों को समय पर सहायता मिल सकेगी।

बैठक में यह भी तय किया गया कि अनुग्रह राशि के दोहरे भुगतान को रोकने के लिए सत्यापन को अनिवार्य किया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति राज्य या केंद्र सरकार की किसी बीमा योजना के तहत आच्छादित है, तो उसे केवल एक ही योजना के तहत लाभ मिलेगा, जिससे अनियमितताओं पर रोक लगेगी।

 

आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत करने के लिए जिला स्तर पर कार्यरत पदाधिकारियों की सेवा अवधि बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया। इससे जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की कार्यक्षमता में निरंतरता बनी रहेगी और आपात स्थितियों में बेहतर समन्वय संभव हो सकेगा।

बैठक में “युवा आपदा मित्र योजना” को और प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया। इसके तहत स्वयंसेवकों का एक समग्र डाटाबेस तैयार किया जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर उनकी सेवाएं तुरंत ली जा सकें। मुख्यमंत्री ने इस योजना के तहत कार्य करने वाले युवाओं के लिए मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करने और उन्हें उचित भत्ता देने का प्रस्ताव भी तैयार करने के निर्देश दिए।

राज्य में पानी में डूबने से होने वाली मौतों को गंभीरता से लेते हुए गोताखोरों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इस कार्य में पुलिस जवानों, गृहरक्षकों के साथ-साथ महिलाओं की भी भागीदारी सुनिश्चित की जाए और इसके लिए विस्तृत कार्य योजना बनाई जाए।

बैठक में आपदा प्रबंधन मंत्री इरफान अंसारी, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह, सचिव प्रशांत कुमार और सचिव विप्रा भाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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