दिल्ली विधानसभा में छिड़ी सियासी जंग… महिला आरक्षण पर बहस के बीच केजरीवाल पर CM रेखा गुप्ता का तीखा हमला
सुनीता, आतिशी और स्वाति का जिक्र कर उठाए बड़े सवाल, सदन में बढ़ी गर्मी… आरोप-प्रत्यारोप से गरमाया राजनीतिक माहौल

नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के दौरान सियासी माहौल अचानक गरमा गया, जब मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए महिला आरक्षण में देरी के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने विपक्ष की सोच को “महिला विरोधी” बताते हुए कहा कि दशकों तक महिलाओं को उनका संवैधानिक अधिकार नहीं मिल पाया।
सीएम रेखा गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि अब 78 वर्षों का इंतजार खत्म होना चाहिए और महिलाओं को राजनीति में उनका उचित प्रतिनिधित्व मिलना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाएं सामाजिक और व्यावहारिक स्तर पर पुरुषों से ज्यादा चुनौतियों का सामना करती हैं, इसलिए उनके सशक्तिकरण के लिए ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी है।
बहस के दौरान उन्होंने आम आदमी पार्टी के संयोजक Arvind Kejriwal पर भी तीखा प्रहार किया। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि जब केजरीवाल जेल में थे, तब उनकी पत्नी Sunita Kejriwal को “डिफैक्टो मुख्यमंत्री” बनाने की चर्चा चल रही थी। उन्होंने दावा किया कि जनता के विरोध के बाद यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका और बाद में Atishi Marlena को मुख्यमंत्री पद के लिए सामने लाया गया।
सीएम ने आगे कहा कि इस पूरे घटनाक्रम ने सत्ता के भीतर फैसलों की पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए। उनके अनुसार, “सीएम की कुर्सी को लेकर एक तय ढांचा” नजर आया, जिससे लोकतांत्रिक मूल्यों पर सवाल उठते हैं।
केजरीवाल साहब, जिन्होंने अपने जेल जाने के बाद पूरी कोशिश की कि मेरी धर्मपत्नी डी-फैक्टो मुख्यमंत्री बन जाएं।
समाज से रोष आया तो आतिशी बहन को बुलाना पड़ा। पर पूरी दुनिया ने देखा कि उन्होंने उन्हें अपनी कुर्सी पर नहीं बैठने दिया।
स्वाति मालीवाल जी ने एक ट्वीट लिखा है, अपने मन का… pic.twitter.com/RZJG50eH7a
— Rekha Gupta (@gupta_rekha) April 28, 2026
इस दौरान उन्होंने राज्यसभा सांसद Swati Maliwal के हालिया सोशल मीडिया पोस्ट का भी जिक्र किया। रेखा गुप्ता ने कहा कि मालीवाल ने अपनी “मन की व्यथा” सार्वजनिक रूप से व्यक्त की है, जो पार्टी के भीतर की स्थिति को उजागर करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी के कई सदस्य इस चर्चा के दौरान इसलिए सदन से बाहर चले गए क्योंकि वे “सच्चाई सुनने को तैयार नहीं थे।”
मुख्यमंत्री ने 16, 17 और 18 अप्रैल के दिनों को भारतीय लोकतंत्र के लिए “दुखद अध्याय” बताते हुए कहा कि महिलाओं को लंबे समय से जिस प्रतिनिधित्व की उम्मीद थी, वह पूरी नहीं हो सकी। इससे महिलाओं में निराशा का माहौल बना है।
वहीं दूसरी ओर, स्वाति मालीवाल ने भी आम आदमी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने पार्टी को “झूठ, फरेब और मक्कारी” की राजनीति करने वाला बताते हुए कहा कि उन्होंने पार्टी की कार्यशैली और Arvind Kejriwal की राजनीतिक शैली से परेशान होकर संगठन से दूरी बनाई। उन्होंने केजरीवाल को राजघाट जाकर आत्मचिंतन करने की सलाह भी दी।
इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि महिला आरक्षण जैसे गंभीर मुद्दे पर भी सियासत अपने चरम पर है, और आने वाले दिनों में यह टकराव और तेज हो सकता है।









