वोटिंग शुरू होते ही बंगाल में बेकाबू हालात… बूथ पर खून, सड़कों पर हंगामा, EVM को लेकर बवाल ने बढ़ाई टेंशन

नादिया में बूथ एजेंट पर हमला, हावड़ा में EVM को लेकर भड़के लोग, कई जगहों पर झड़प और हिरासत… चुनावी माहौल में बढ़ी बेचैनी


कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे और अंतिम चरण की वोटिंग जैसे ही सुबह 7 बजे शुरू हुई, वैसे ही कई इलाकों से तनाव और हंगामे की खबरें सामने आने लगीं। मतदान के बीच हिंसा, झड़प और EVM में गड़बड़ी के आरोपों ने पूरे चुनावी माहौल को गर्म कर दिया है।

नादिया जिले के छपरा इलाके में स्थिति उस वक्त बिगड़ गई, जब बूथ नंबर 53 पर एक बीजेपी बूथ एजेंट पर हमला कर दिया गया। हमले में एजेंट का सिर फूट गया। बीजेपी ने इस हमले के पीछे टीएमसी समर्थकों का हाथ होने का आरोप लगाया है। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया और सुरक्षा बढ़ा दी गई।

वहीं हावड़ा के बाली विधानसभा क्षेत्र में डॉन बॉस्को लिलुआ सहनलाल विद्यालय स्थित पोलिंग बूथ पर EVM में खराबी की खबर फैलते ही मतदाता भड़क उठे। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया और हंगामा शुरू हो गया। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस और सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाला। CRPF जवानों ने मौके से दो लोगों को हिरासत में लिया और अतिरिक्त बल तैनात कर हालात पर काबू पाया। जानकारी के मुताबिक, 152, 153 और 154 नंबर बूथों पर भी गड़बड़ी और विवाद की खबरें आई हैं।

कोलकाता की एंटली विधानसभा सीट पर भी माहौल गरमा गया, जहां बीजेपी प्रत्याशी प्रियंका टिबरेवाल की चुनाव अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों से तीखी बहस हो गई। बताया जा रहा है कि बूथ छोटा होने के कारण उनके एजेंट को बाहर कर दिया गया था, जिसके बाद विवाद बढ़ गया। इस दौरान टीएमसी के एजेंट भी बहस में शामिल हो गए, जिसके बाद दोनों पक्षों को बूथ से बाहर करना पड़ा।

श्यामपुकुर इलाके में भी बूथ संख्या 140 और 143 पर हंगामे की खबर सामने आई है। आरोप है कि बीजेपी के एक एजेंट को उसकी सीट पर बैठने से रोका गया और उसे धमकाया गया। इस दौरान उम्मीदवार पूर्णिमा चक्रवर्ती मौके पर पहुंचीं और स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।

इधर, पूर्व बर्धमान के कटवा विधानसभा क्षेत्र के बूथ नंबर 95 और नॉर्थ दमदम के बूथ नंबर 66 पर भी EVM खराब होने की शिकायतें सामने आई हैं। सुबह से कतार में खड़े मतदाताओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे नाराजगी बढ़ती जा रही है।

चुनाव के बीच इस तरह की घटनाओं ने प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस और केंद्रीय बल हालात पर नजर बनाए हुए हैं और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

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