झारखंड शराब घोटाले पर सियासत गरमाई…एसीबी की जांच पर बाबूलाल मरांडी ने उठाए गंभीर सवाल
Politics Heats Up Over Jharkhand Liquor Scam; Babulal Marandi Raises Serious Questions Over ACB Probe

झारखंड में चर्चित शराब घोटाले को लेकर एक बार फिर सियासी माहौल गरमा गया है। नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए आरोप लगाया है कि सैकड़ों करोड़ रुपये के इस घोटाले में मजबूत सबूत होने के बावजूद अब तक एक भी चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है।
जांच में देरी पर उठे सवाल, जानबूझकर ढिलाई का आरोप
बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि जांच प्रक्रिया में जानबूझकर देरी की जा रही है, जिससे आरोपियों को फायदा मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यह मामला देश के उन दुर्लभ मामलों में से हो सकता है, जहां जांच एजेंसी और उसके अधिकारी स्वयं भविष्य में जांच के दायरे में आ सकते हैं।
डिफॉल्ट बेल और 90 दिन की समयसीमा पर सवाल
मरांडी ने कहा कि एसीबी की अपनी जांच में ही कई अनियमितताएं सामने आ चुकी हैं। मुख्यमंत्री के पूर्व सचिव समेत कई बड़े अधिकारियों की गिरफ्तारी और पूछताछ के बावजूद 17 में से 14 आरोपियों को डिफॉल्ट बेल मिल गई। इसका कारण यह बताया गया कि एसीबी ने 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं की।
उन्होंने इसे “कानून के साथ मजाक” और “जांच की प्रक्रिया को कमजोर करने” जैसा कदम बताया है।
डिजिटल सबूतों पर भरोसा, जांच पर उठाई गंभीर आशंका
विपक्ष के नेता ने कहा कि भले ही कागजी फाइलें गायब करने की कोशिश की जाए, लेकिन डिजिटल सबूतों को मिटाना संभव नहीं है। उन्होंने दावा किया कि सच्चाई अंततः सामने आएगी और न्याय की प्रक्रिया भले धीमी हो, लेकिन वह सटीक तरीके से काम करती है।
केंद्र से हस्तक्षेप की मांग
बाबूलाल मरांडी ने इस मामले में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से हस्तक्षेप की भी अपील की है। उनका कहना है कि इतने बड़े घोटाले की निष्पक्ष जांच के लिए उच्च स्तरीय निगरानी जरूरी है।
सरकार और ACB की चुप्पी
फिलहाल इस पूरे मामले पर राज्य सरकार या एसीबी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना बढ़ गई है।









