धरती पर बढ़ती तपिश का खौफनाक असर… गर्मी ने ऐसा क्या किया कि बिजली सिस्टम भी पहुंचा टूटने की कगार?

देश में पहली बार 256 GW पार पहुंची बिजली की मांग, एक्सपर्ट्स ने जताई और बड़े खतरे की आशंका


नई दिल्ली। देश में बढ़ती गर्मी अब सिर्फ लोगों की परेशानी नहीं रही, बल्कि यह सिस्टम पर भी भारी दबाव डालने लगी है। भीषण गर्मी के बीच भारत में बिजली की मांग ने ऐसा रिकॉर्ड बनाया है, जिसने चिंता बढ़ा दी है।

केंद्रीय बिजली मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, शनिवार को देश में बिजली की मांग 256.11 गीगावाट (GW) के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। खास बात यह रही कि इस रिकॉर्ड स्तर की मांग को पूरा भी किया गया, लेकिन जिस तेजी से डिमांड बढ़ रही है, उसने आने वाले दिनों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है।

यह आंकड़ा पिछले सभी रिकॉर्ड को पीछे छोड़ चुका है। इससे एक दिन पहले शुक्रवार को 252.07 GW और मई 2024 में 250 GW का स्तर दर्ज किया गया था। शनिवार को दोपहर 3:38 बजे यह मांग अपने चरम पर पहुंची और देश ने पहली बार इस स्तर को पार किया।

इस अचानक बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ी वजह भीषण गर्मी है। जैसे-जैसे तापमान बढ़ रहा है, वैसे-वैसे लोग एसी, कूलर, पंखे और फ्रिज का इस्तेमाल ज्यादा कर रहे हैं, जिससे बिजली की खपत लगातार बढ़ती जा रही है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, देश के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से 5 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक दर्ज किया गया है, जो ‘हीट स्ट्रेस’ की स्थिति को दर्शाता है। राजधानी दिल्ली में शनिवार को अधिकतम तापमान 42.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस साल का अब तक का सबसे ज्यादा है। यह 2022 के बाद का सबसे ऊंचा तापमान भी माना जा रहा है।

मौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली में लगातार तीसरे दिन लू चली, जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं। वहीं, एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह सिर्फ शुरुआत है। आने वाले दिनों में बिजली की मांग 270 GW तक पहुंच सकती है, जो इस सीजन के लिए अनुमानित अधिकतम स्तर है।

बढ़ती मांग और लगातार चढ़ते तापमान ने यह साफ कर दिया है कि अगर हालात ऐसे ही रहे, तो देश के बिजली ढांचे पर भारी दबाव पड़ सकता है। फिलहाल सिस्टम ने इस चुनौती को संभाल लिया है, लेकिन गर्मी का यह तेवर अगर और बढ़ा, तो स्थिति और भी डराने वाली हो सकती है।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

close