लखनऊ में आग का तांडव! एक-एक कर फटे 30 सिलेंडर, 50 झोपड़ियां राख—क्या सच में जिंदा जल गए 4 मासूम?

कुछ ही मिनटों में बस्ती बनी मौत का मैदान, धमाकों से दहला इलाका—चीखों के बीच उठे कई दर्दनाक सवाल

लखनऊ। लखनऊ से बुधवार शाम एक ऐसी भयावह घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके को दहला कर रख दिया। विकासनगर सेक्टर-14 की झुग्गी बस्ती में अचानक लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया और कुछ ही मिनटों में 50 से ज्यादा झोपड़ियों को जलाकर खाक कर दिया।

आग इतनी भयानक थी कि उसके साथ लगातार धमाके होने लगे। बताया जा रहा है कि 30 से अधिक गैस सिलेंडर और फ्रिज के कंप्रेसर एक के बाद एक फटते रहे, जिससे पूरा इलाका कांप उठा। आसमान में काले धुएं का गुबार छा गया और आग की लपटें कई किलोमीटर दूर तक दिखाई देने लगीं।

इस दौरान बस्ती में अफरा-तफरी मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। चीख-पुकार और रोने की आवाजों ने माहौल को और भी भयावह बना दिया। इसी बीच एक युवक ने दावा किया कि उसकी झोपड़ी में फंसे उसके चार बच्चे जिंदा जल गए। हालांकि, प्रशासन ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन इस खबर से पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है।

आग की गंभीरता को देखते हुए आसपास के करीब 20 पक्के मकानों को खाली करा लिया गया और एहतियात के तौर पर बिजली सप्लाई भी काट दी गई।

घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग हरकत में आया। करीब 18 से ज्यादा फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाने की कोशिश जारी रही। अधिकारियों के अनुसार, आग को फैलने से काफी हद तक रोक लिया गया है, लेकिन पूरी तरह बुझाने का काम देर रात तक चलता रहा।

इस हादसे में कई परिवार पूरी तरह उजड़ गए। लोगों का घर, सामान, कपड़े, जरूरी दस्तावेज—सब कुछ आग की भेंट चढ़ गया। महिलाएं और बच्चे रोते-बिलखते अपने जले हुए घरों को देख रहे हैं, जबकि कई लोग अब भी अपने लापता परिजनों की तलाश में भटक रहे हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना का तुरंत संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक भी घटनास्थल पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया।

प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट या गैस लीकेज मानी जा रही है। हालांकि, असली कारणों का पता लगाने के लिए पुलिस और फायर विभाग की टीमें जांच में जुटी हैं।

यह दर्दनाक हादसा एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि घनी आबादी वाली झुग्गी बस्तियों में सुरक्षा के इंतजाम आखिर कब मजबूत होंगे—या फिर ऐसी आग यूं ही हर बार कई जिंदगियों को निगलती रहेगी।

 

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