झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा : भोजपुरी, मगही और अंगिका पर छिड़ा भाषाई विवाद…अपनी ही सरकार के खिलाफ उतरे मंत्री
झारखंड में भाषा को लेकर अस्मिता की नई बहस, सत्ता पक्ष के भीतर से भी विरोध के सुर

रांची से एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा सामने आया है, जहां झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी JETET की संशोधित नियमावली 2026 को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। भोजपुरी, मगही और अंगिका जैसी प्रमुख भाषाओं को सूची से बाहर किए जाने के बाद राज्य में भाषाई अस्मिता पर बहस तेज हो गई है।
सरकार के भीतर से ही विरोध, वित्त मंत्री ने जताई कड़ी आपत्ति
इस फैसले पर सबसे चौंकाने वाली प्रतिक्रिया राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की ओर से आई है। उन्होंने इस निर्णय को बड़ी आबादी के साथ अन्याय बताते हुए अपनी ही गठबंधन सरकार के सहयोगी दल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष को पत्र लिखा है।
11 साल पुरानी व्यवस्था बदलने पर उठे सवाल, बिना आधार हटाई गई भाषाएं
मंत्री ने अपने पत्र में कहा है कि वर्ष 2011 की नियमावली में ये तीनों भाषाएं JETET की क्षेत्रीय भाषा सूची में शामिल थीं। लेकिन 2026 की नई नियमावली में इन्हें बिना किसी स्पष्ट और ठोस आधार के हटा दिया गया है, जो गंभीर सवाल खड़े करता है।
एक करोड़ से अधिक लोगों की मातृभाषा पर असर का दावा
राधाकृष्ण किशोर ने यह भी उल्लेख किया कि पलामू, गढ़वा, धनबाद, कोडरमा, गिरिडीह और गोड्डा जैसे जिलों में लगभग एक करोड़ से अधिक लोग भोजपुरी, मगही और अंगिका को अपनी मातृभाषा के रूप में उपयोग करते हैं। ऐसे में इन्हें बाहर करना जनभावनाओं के खिलाफ माना जा रहा है।
दोहरी नीति के आरोप, चयन प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
वित्त मंत्री ने इस निर्णय को भेदभावपूर्ण बताते हुए कहा कि जब कम बोली जाने वाली भाषाओं को नियमावली में स्थान दिया जा सकता है, तो व्यापक रूप से बोली जाने वाली भाषाओं को नजरअंदाज करना समझ से परे है। उन्होंने इसे दोहरी नीति करार दिया है।
कांग्रेस से हस्तक्षेप की मांग, नियमावली में बदलाव का आग्रह
उन्होंने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष से आग्रह किया है कि इस मुद्दे को पार्टी स्तर पर गंभीरता से उठाया जाए और मुख्यमंत्री से बातचीत कर इन भाषाओं को JETET नियमावली में पुनः शामिल कराने की पहल की जाए।
भाषाई पहचान बनाम नीति, आने वाले दिनों में बढ़ सकता है विवाद
इस फैसले के बाद झारखंड में भाषा, पहचान और नीति को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है और क्या नियमावली में कोई संशोधन किया जाएगा या नहीं।









