झारखंड : हजारीबाग में IPL सट्टेबाजी का खतरनाक जाल…युवाओं को अमीरी के सपने दिखाकर बर्बादी की ओर धकेल रहा नेटवर्क
A Dangerous Web of IPL Betting in Hazaribagh: A Network Luring Youth with Dreams of Riches, Pushing Them Towards Ruin

हजारीबाग से एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है, जहां आईपीएल के नाम पर सट्टेबाजी का संगठित और हाईटेक नेटवर्क युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रहा है। रातों-रात अमीर बनने का लालच देकर यह गिरोह युवाओं को ऐसे जाल में फंसा रहा है, जहां से निकलना बेहद मुश्किल हो जाता है।
स्थानीय युवाओं पर नेटवर्क चलाने का आरोप, कई इलाके बने हॉटस्पॉट
कुम्हारटोली नालापर के मयंक और प्रिंस पर इस अवैध नेटवर्क को संचालित करने के आरोप लगे हैं। शहर के कानी बाजार, दिपुगढ़ा, हरनगंज, बुच्चड़ टोली रोड और रामनगर जैसे इलाके अब सट्टेबाजी के प्रमुख केंद्र बनते जा रहे हैं।
व्हाट्सएप और टेलीग्राम से चल रहा खेल, पूरा लेनदेन ऑनलाइन
इस नेटवर्क का संचालन पूरी तरह डिजिटल तरीके से किया जा रहा है। व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर रेट तय होते हैं, जबकि पैसों का लेनदेन ऑनलाइन माध्यम से किया जाता है। इसमें वही युवा सक्रिय बताए जा रहे हैं, जो अन्य साइबर अपराधों में भी शामिल रहते हैं।
रांची कनेक्शन से बढ़ा दायरा, बड़े सट्टेबाजों से जुड़े तार
सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा नेटवर्क रांची के बड़े सट्टेबाजों से जुड़ा हुआ है। मयंक और प्रिंस उनके लिए काम करते हैं, जबकि उनके अधीन कई अन्य ऑपरेटर भी सक्रिय हैं। नए युवाओं को जोड़कर इस नेटवर्क को लगातार विस्तार दिया जा रहा है।
पहले भी हो चुकी कार्रवाई, फिर भी नहीं थम रहा खेल
पिछले साल पुलिस ने इचाक में छापेमारी कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया था, जिसके मोबाइल से सट्टेबाजी के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ था। उस समय कई अन्य युवाओं पर भी केस दर्ज हुआ था, लेकिन इसके बावजूद यह अवैध गतिविधि बंद नहीं हो पाई।
चमक से शुरू होकर कर्ज में खत्म, युवाओं की जिंदगी हो रही तबाह
सट्टेबाजी की शुरुआत में कुछ युवाओं को महंगी गाड़ियां, जमीन और पैसों का लालच मिलता है, लेकिन जल्द ही यह सब कर्ज और आर्थिक बर्बादी में बदल जाता है। कई युवा, जो पहले लाखों में खेलते थे, आज छोटी रकम के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं।
साइबर सेल पर उठे सवाल, क्या थमेगा यह काला कारोबार
इस पूरे मामले में साइबर सेल की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि हजारीबाग का यह नेटवर्क अब जयपुर और दिल्ली जैसे बड़े शहरों तक फैल चुका है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन इस अवैध सट्टा कारोबार पर लगाम लगा पाएगा या हर सीजन के साथ यह जाल और फैलता जाएगा।









