मुजफ्फरपुर। ट्रांसफर को लेकर मंत्री और मुख्यमंत्री आमने-सामने आते दिख रहे हैं। राजस्व व भूमि सुधार मंत्री ने 30 जून को किये तबादलों को रोकने के मुख्यमंत्री के आदेश पर नाराज हैं। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए इस बात को स्वीकार भी किया कि सीएमओ के इस फैसले से उनकी भावना को ठेस पहुंची है। उन्होंने साफ किया कि समीक्षा करना मुख्यमंत्री की विशेषाधिकार है। ऐसी स्थिति बनी तो फिर जनता के बीच जाने का कोई औचित्य नहीं रह जायेगा। दरअसल बिहार सरकार के राजस्व विभाग के मंत्री रामसूरत राय ने बीते दिनों बड़े पैमाने पर विभागीय अधिकारियों का तबादला किया गया था. इस तबादले की पूरी प्रक्रिया पर सीएमओ की ओर से तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गयी है. यह दूसरा ऐसा मामला है जब विभागीय तबादले पर सीएमओ ने रोक लगायी है.

राजस्व मंत्री ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि राजनीति किसी की बपौती नहीं होती। आज किसी के पास है, कल किसी और के पास भी हो सकती है। सीओ, बंदोबस्त पदाधिकारी, चकबंदी पदाधिकारी के ट्रांसफर को लेकर विपक्ष के आरोपों पर मंत्री रामसूरत राय ने कहा कि उनका काम ही सिर्फ आरोप लगाना है।

उन्होंने कहा कि वो चैंबर वाले नेता नहीं है। इस घटना से उनके मन में ठेस लगी है। उन्होंने जनता दरबार लगाना छोड़ देने की भी बात कही है। उन्होंने कहा कि राजनीति वंशावली पर काम नहीं करता, यहां कोई भी और जा सकता है। मैं शुभकामना देता हूं कि कोई भी यहां आये और विभाग को बेहतर ढंग से चलाये। जिस लहजे में मंत्री बात कर रहे थे, उससे साफ संकेत था कि वो इस्तीफा देने की पेशकश कर रहे हैं।

इस मामले के सामने आने के बाद जदयू और भाजपा के बीच एक बार फिर तल्खी देखने को मिल सकती है। पिछले कई दिनों से ये बयानबाजी बंद थी। 30 जून की रात राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने 149 सीओ, 27 सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी और दो चकबंदी पदाधिकारियों का ट्रांसफर-पोस्टिंग किया था. मुख्यमंत्री ने इस तबादले पर रोक लगाते हुए इसकी समीक्षा के आदेश दिये थे. आरोप है कि ट्रांसफर पोस्टिंग में बड़े पैमाने पर पैसे का खेल हुआ.

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