झारखंड में ट्रेजरी घोटाले का बड़ा खुलासा…फर्जी वेतन निकासी से करोड़ों के खेल की जांच तेज
Major Revelation in Jharkhand Treasury Scam: Investigation Intensifies into Multi-Crore Fraud Involving Fraudulent Salary Withdrawals

झारखंड में सरकारी खजाने से अवैध निकासी के दो बड़े मामलों ने प्रशासनिक सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बोकारो ट्रेजरी घोटाले और खूंटी के एसआइआरबी-2 में फर्जी वेतन भुगतान मामले की जांच में लगातार चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुलिस और जांच एजेंसियों ने कई अधिकारियों और कर्मचारियों को संदेह के घेरे में लिया है।
बोकारो ट्रेजरी घोटाले में अकाउंटेंट गिरफ्तार, रिमांड के बाद भेजा गया जेल
बोकारो ट्रेजरी घोटाले की जांच में बड़ा एक्शन लेते हुए एसपी ऑफिस की लेखा शाखा में पदस्थ रहे अकाउंटेंट कौशल पांडेय को जेल भेज दिया गया है। तीन दिन की रिमांड के दौरान हुई पूछताछ में उसने कई अहम जानकारियां जांच एजेंसियों को दी हैं।
जांच अधिकारियों के मुताबिक कौशल पांडेय ने कबूल किया कि फर्जी निकासी से मिली रकम का हिस्सा विभाग के कई लोगों तक पहुंचाया गया था। अब उन सभी लोगों से पूछताछ की तैयारी की जा रही है, जिनके नाम जांच में सामने आए हैं।
रिटायर्ड हवलदार को नौकरी में दिखाकर निकाला गया पैसा
जांच में यह भी सामने आया है कि सेवानिवृत्त हवलदार उपेंद्र सिंह को कागजों में सेवा में कार्यरत दिखाया गया और उनके नाम पर वेतन की राशि निकाली जाती रही। नवंबर 2023 से मार्च 2026 के बीच कुल 63 बार अवैध निकासी किए जाने की जानकारी सामने आई है।
इतना ही नहीं, जांच एजेंसियों को यह भी पता चला है कि घोटाले से जुड़ी रकम अकाउंटेंट ने अपनी पत्नी अनु पांडेय और मां के बैंक खातों में भी ट्रांसफर की थी।
खूंटी में भी फर्जी वेतन भुगतान का बड़ा खेल
वहीं खूंटी जिले के एसआइआरबी-2 में वेतन के नाम पर लाखों रुपये की अवैध निकासी का मामला भी सामने आया है। इस मामले में खूंटी थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है। केस कोषागार पदाधिकारी शिवकुमार सिंह की शिकायत पर दर्ज हुआ।
एफआईआर में एसआइआरबी-2 के अकाउंटेंट अजीत कुमार सिंह और शुभम नाम के व्यक्ति को आरोपी बनाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ और भी नाम सामने आ सकते हैं।
28 बार में निकाले गए 22.69 लाख रुपये
जांच में खुलासा हुआ है कि कुल 28 बार में 22 लाख 69 हजार 657 रुपये की अवैध निकासी की गई। इसके लिए पांच अलग-अलग लोगों के नाम पर फर्जी बिल तैयार किए गए और राशि दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर की गई।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिन लोगों के नाम पर फर्जी निकासी हुई, उनके असली खातों में नियमित वेतन भी भेजा जा रहा था। यानी समानांतर तरीके से अलग बिल बनाकर सरकारी रकम निकाली जाती रही।
जांच के घेरे में कई कर्मचारी और अधिकारी
दोनों मामलों में पुलिस और जांच एजेंसियां अब विभागीय मिलीभगत की आशंका पर भी काम कर रही हैं। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि बिना अंदरूनी सहयोग के इतने लंबे समय तक फर्जी निकासी संभव नहीं थी। आने वाले दिनों में कई और अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई हो सकती है।









