शादी के कुछ महीनों बाद ही क्यों मर रहीं बेटियां? कहीं फांसी, कहीं दफन शव… दहेज की वो Inside Story जिसने देश को डरा दिया

‘पापा ये मुझे मार देंगे…’ आखिरी कॉल, संदिग्ध मौतें और दहेज का खौफनाक खेल, क्या बहुओं के लिए मौत बन रही शादी?

नई दिल्ली। देश में पिछले दो हफ्तों के भीतर सामने आए कई मामलों ने एक बार फिर लोगों को झकझोर कर रख दिया है। कहीं नई नवेली दुल्हन फंदे पर लटकी मिली, कहीं छत से गिरकर मौत हो गई, तो कहीं शव को चुपचाप दफना देने का आरोप लगा। हर केस की कहानी अलग है, लेकिन हर कहानी में एक डरावनी समानता दिखाई दे रही है दहेज, प्रताड़ना और संदिग्ध मौत।

कर्नाटक, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और ओडिशा से सामने आए मामलों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर शादी के बाद बेटियां सुरक्षित क्यों नहीं हैं? क्या आधुनिक भारत में भी दहेज की भूख बहुओं की जान ले रही है?

कर्नाटक के बल्लारी जिले में 24 वर्षीय ऐश्वर्या की मौत ने लोगों को हैरान कर दिया। पुलिस के मुताबिक, उसने कथित तौर पर सुसाइड नोट छोड़ा, जिसमें पति और ससुराल वालों पर मानसिक प्रताड़ना और दहेज के लिए दबाव बनाने के आरोप लगाए गए। शादी को अभी डेढ़ साल भी पूरे नहीं हुए थे।

ग्रेटर नोएडा में 24 वर्षीय दीपिका की मौत को परिवार हादसा मानने को तैयार नहीं है। आरोप है कि उसे बेरहमी से पीटकर छत से नीचे फेंका गया ताकि मामला दुर्घटना लगे। परिवार का दावा है कि शादी के बाद से ही फॉर्च्यूनर कार समेत कई महंगी मांगों को लेकर दीपिका को प्रताड़ित किया जा रहा था। शरीर पर मिले चोटों के निशानों ने शक और गहरा कर दिया।

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में 21 वर्षीय पलक रजक की मौत ने भी कई सवाल खड़े कर दिए। पिता का आरोप है कि बेटी को वाहन की मांग को लेकर लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। वह अक्सर फोन पर मारपीट और अपमान की बातें बताती थी, लेकिन परिवार समाज और रिश्तों को बचाने की कोशिश में चुप रहा।

सबसे डराने वाला मामला उत्तर प्रदेश के अमरोहा से सामने आया। 19 वर्षीय पुष्पेंद्रि देवी ने मौत से कुछ घंटे पहले पिता को फोन कर कहा था, “पापा, ये मुझे मार देंगे।” उसी रात वह फंदे से लटकी मिली। परिवार का आरोप है कि 10 लाख रुपए की मांग पूरी न होने पर हत्या कर उसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई।

ओडिशा के जाजपुर में तो मामला और ज्यादा सनसनीखेज निकला। 21 वर्षीय प्रमिला दास का शव पुलिस ने जमीन से खुदवाया। आरोप है कि दहेज के लिए हत्या के बाद बिना परिवार को बताए अंतिम संस्कार तक कर दिया गया।

इन घटनाओं के बीच NCRB के आंकड़े भी डराने वाले हैं। 2024 में देशभर में दहेज मौत के 5737 मामले दर्ज किए गए। सबसे ज्यादा 2038 मामले उत्तर प्रदेश से सामने आए, जबकि बिहार दूसरे नंबर पर रहा। आंकड़े बताते हैं कि दहेज की आग सिर्फ गांवों या गरीब परिवारों तक सीमित नहीं रही, बल्कि बड़े शहर और पढ़े-लिखे परिवार भी इसकी गिरफ्त में हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि आज दहेज का रूप बदल चुका है। अब इसे सीधे दहेज नहीं कहा जाता, बल्कि ‘गिफ्ट’, ‘स्टेटस’ और ‘सपोर्ट’ जैसे नामों में छिपा दिया जाता है। शादी के बाद कार, फ्लैट, बिजनेस के लिए पैसा और महंगे सामान की मांगें शुरू हो जाती हैं। कई महिलाएं सामाजिक बदनामी और रिश्ते टूटने के डर से सालों तक चुपचाप हिंसा सहती रहती हैं।

शोधकर्ताओं की स्टडी में भी सामने आया है कि आर्थिक विकास के साथ दहेज की रकम और बढ़ी है। अच्छी नौकरी वाले लड़कों की “कीमत” ज्यादा लगाई जाने लगी। शादी अब रिश्ते से ज्यादा एक आर्थिक सौदे में बदलती जा रही है।

हालांकि देश में दहेज निषेध कानून और सख्त धाराएं मौजूद हैं, लेकिन दोषियों को सजा दिलाना आज भी आसान नहीं है। कई मामलों में सबूत मिटा दिए जाते हैं, गवाह मुकर जाते हैं या परिवार दबाव में समझौता कर लेते हैं।

अब सवाल यही है कि आखिर कब तक बेटियां शादी के बाद इस खौफ में जिएंगी? और क्या हर संदिग्ध मौत के पीछे सच कभी पूरी तरह सामने आ पाएगा या फिर कई कहानियां हमेशा के लिए दहेज की आग में दफन होती रहेंगी?

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