रांची : रसोई में आया बदलाव : अब गोबर गैस से पक रहा खाना..गांव बना आत्मनिर्भर का मॉडल

रांची से नई पहल: चुरू गांव में बदली रसोई की तस्वीर

रांची : जिले के नामकुम क्षेत्र स्थित चंदाघासी पंचायत के चुरू गांव में अब रसोई का अंदाज पूरी तरह बदल चुका है। यहां करीब 20 परिवार पारंपरिक ईंधन को छोड़कर गोबर गैस से भोजन तैयार कर रहे हैं। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की पहल से गांव में बायोगैस प्लांट स्थापित किए गए हैं, जिससे लोगों को सस्ती और आसानी से उपलब्ध गैस मिल रही है।

एलपीजी से मिली राहत, अब खुद की गैस पर निर्भर गांव
गांव के लोगों के अनुसार पहले एलपीजी सिलेंडर पर खर्च ज्यादा होता था और समय पर गैस मिलना भी चुनौती था। अब यह समस्या खत्म हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि अब मवेशियों से मिलने वाले गोबर से ही गैस तैयार हो रही है और सिलेंडर भरवाने की जरूरत नहीं पड़ती।

पशुपालकों को मिल रहा सीधा लाभ
इस योजना का लाभ उन परिवारों को दिया जा रहा है जो पशुपालन से जुड़े हैं। विभाग ने इसके लिए कम से कम 4 से 5 मवेशी होना जरूरी तय किया है, ताकि गोबर की नियमित आपूर्ति बनी रहे और गैस उत्पादन लगातार हो सके। चुरू गांव में यह योजना एलपीजी की कमी के बीच राहत का मजबूत विकल्प बनकर उभरी है।

गैस के साथ मिल रही खेतों के लिए जैविक खाद
बायोगैस प्लांट का एक और बड़ा फायदा यह है कि इससे जैविक खाद भी तैयार हो रही है। इससे किसानों को खेती में मदद मिल रही है और रासायनिक खाद पर निर्भरता घट रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह पहल गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभा रही है।

कम संसाधन में ज्यादा फायदा, सिस्टम साबित हो रहा कारगर
ग्रामीणों के मुताबिक लगभग 10 किलो गोबर से करीब आधे घंटे तक 20 घरों में चूल्हा जलाया जा सकता है। वहीं 50 किलो गोबर से 2 से 3 घंटे तक गैस मिलती है। इससे साफ है कि कम संसाधन में भी यह तकनीक प्रभावी साबित हो रही है।

सिर्फ 100 रुपये में मेंटेनेंस, खर्च में भारी कटौती
बायोगैस प्लांट के रखरखाव के लिए लाभार्थियों से हर महीने करीब 100 रुपये लिए जाते हैं। इसी राशि से मरम्मत और देखभाल की व्यवस्था होती है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले गैस सिलेंडर पर ज्यादा खर्च होता था, लेकिन अब बेहद कम लागत में काम चल रहा है।

स्वच्छता और आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम
यह पहल स्वच्छ भारत मिशन और गोवर्धन योजना की तर्ज पर संचालित की जा रही है। इसका उद्देश्य गांवों में स्वच्छता बढ़ाना और वैकल्पिक ऊर्जा को बढ़ावा देना है। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता आनंद कुमार सिंह ने बताया कि आने वाले समय में इस योजना का विस्तार अन्य गांवों तक करने की तैयारी की जा रही है।

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