“झारखंड में हीट वेव का ‘रेड अलर्ट’! स्वास्थ्य विभाग ने जारी किए सख्त निर्देश, जानें अस्पतालों में लू से निपटने के लिए क्या हैं नए इंतजाम।”
"Heatwave 'Red Alert' in Jharkhand! The Health Department has issued strict directives; find out what new arrangements have been put in place in hospitals to combat heatstroke."

रांची, झारखंड में लगातार बढ़ते तापमान और लू की गंभीर स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग की चेतावनी के बाद राज्य के सभी जिलों को आपात सतर्कता बरतने और तत्काल तैयारी मजबूत करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने सभी सिविल सर्जनों और मेडिकल कॉलेजों को अलग-अलग पत्र भेजकर स्पष्ट कहा है कि लू से बचाव के लिए तुरंत प्रभावी और व्यावहारिक कार्ययोजना लागू की जाए। इसके साथ ही ऐसे क्षेत्रों और लोगों की पहचान करने पर जोर दिया गया है, जो लू के अधिक जोखिम में हैं।
अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का निर्देश, फायर ऑडिट अनिवार्य
स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में सुरक्षा को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। हाल के समय में अस्पतालों में आग लगने की घटनाओं को देखते हुए सभी स्वास्थ्य संस्थानों में फायर सेफ्टी और इलेक्ट्रिकल ऑडिट कराना अनिवार्य कर दिया गया है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आपात स्थिति में जानमाल के नुकसान को रोका जा सके और तुरंत प्रभावी कार्रवाई हो।
हीट स्ट्रोक से निपटने के लिए अस्पतालों में विशेष इंतजाम
राज्य के सभी अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को हीट स्ट्रोक से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहने को कहा गया है। इसके तहत जरूरी दवाइयां, ओआरएस घोल, फ्लूड्स और कूलिंग सिस्टम की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्य कर्मियों को लू प्रबंधन का विशेष प्रशिक्षण देने की भी व्यवस्था की जा रही है, ताकि मरीजों को तुरंत और सही इलाज मिल सके।
108 एंबुलेंस सेवा भी होगी और मजबूत, आपात व्यवस्था तैयार
आपात स्थिति से निपटने के लिए 108 एंबुलेंस सेवाओं को भी विशेष रूप से तैयार किया जा रहा है। एंबुलेंस में आइस क्यूब, ठंडा पानी और जरूरी हाइड्रेशन सपोर्ट की सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
इससे गंभीर रूप से प्रभावित मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के दौरान प्राथमिक उपचार तुरंत मिल सकेगा।
संवेदनशील समूहों पर विशेष निगरानी, हेल्थ डेस्क होगी सक्रिय
स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं, हृदय रोगियों, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के साथ-साथ कुपोषित बच्चों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। इन्हें लू का सबसे अधिक खतरा माना गया है।
सभी स्वास्थ्य केंद्रों में हीट हेल्थ डेस्क स्थापित करने और जरूरतमंद लोगों को मुफ्त ओआरएस उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।
मरीजों की लगातार निगरानी और डेटा रिपोर्टिंग अनिवार्य
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि लू से प्रभावित मरीजों की नियमित जांच और फॉलोअप जरूरी होगा, ताकि उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके।
साथ ही सभी अस्पतालों में हीट स्ट्रोक मामलों की रिपोर्टिंग और डेटा संकलन को अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे भविष्य में बेहतर रणनीति तैयार की जा सके।









