झारखंड: पुलिसकर्मियों के जंबो तबादले की तैयारी, रडार पर सिपाही, हवलदार से लेकर अकाउंटेंट तक, जल्द जारी हो सकता है आदेश
झारखंड में पुलिस विभाग में बड़ी संख्या में तबादले होने वाले हैं। पुलिस महकमा इसकी तैयारी में जुटा हुआ है। माना जा रहा है कि लंबे समय से एक ही जगह जमे पुलिस कर्मियों के तबादले का आदेश किसी भी दिन जारी हो सकता है।

रांची: झारखंड में पुलिसकर्मियों का जंबो तबादला होने वाला है। पुलिस मुख्यालय इसकी तैयारी में जुटा हुआ है। जानकारी मिल रही है कि विभाग में लंबे समय से एक ही जिले में जमे कर्मियों के स्थानांतरण को लेकर सरकार अब सख्त नजर आ रही है। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने इस व्यवस्था को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट निर्देश दिया है कि जो कर्मचारी पांच साल से अधिक समय से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं, उनका अनिवार्य रूप से तबादला किया जाए।
मंत्री के इस आदेश के बाद विभागीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि राज्य में कई ऐसे पुलिस अकाउंटेंट हैं जो वर्षों से एक ही जिले में जमे हुए हैं। कुछ पुलिसकर्मी तो झारखंड राज्य गठन के बाद से ही कर्मी एक ही स्थान पर पदस्थापित हैं और उनका कभी स्थानांतरण नहीं हुआ। इस स्थिति को प्रशासनिक दृष्टि से अनुचित माना जा रहा है, क्योंकि इससे पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक सिर्फ अकाउंटेंट ही नहीं, बल्कि सिपाही, हवलदार में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है। बताया जा रहा है कि जब तक कोई कर्मचारी स्वयं स्थानांतरण के लिए आवेदन नहीं देता या उसके खिलाफ कोई शिकायत या आरोप नहीं लगता, तब तक उसका तबादला नहीं किया जाता। यही कारण है कि बड़ी संख्या में कर्मी वर्षों से एक ही जगह पर कार्यरत हैं।
राज्य में सिपाही और हवलदार संवर्ग में करीब 63 हजार जवान कार्यरत हैं, जबकि लिपिक और उच्च वर्गीय लिपिक संवर्ग में लगभग 1000 कर्मचारी हैं। वहीं एएसआई से लेकर इंस्पेक्टर रैंक तक करीब 12 हजार अधिकारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। हालांकि अधिकारियों के तबादले समय-समय पर होते रहे हैं, लेकिन निचले स्तर के कर्मियों के एकमुश्त स्थानांतरण को लेकर अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई थी।
स्थिति यह भी है कि कई कर्मियों को पदोन्नति मिलने के बावजूद वे उसी जिले में पदस्थापित हैं, जिससे प्रशासनिक संतुलन प्रभावित हो रहा है। लिपिक और उच्च वर्गीय लिपिक संवर्ग में बड़ी संख्या उग्रवादी हिंसा में शहीद हुए पुलिसकर्मियों के आश्रितों की भी है, जो विशेष परिस्थितियों में नियुक्त हुए हैं।पुलिस मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इस समस्या के पीछे तकनीकी कारण भी हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस मैनुअल में लिपिक और उच्च वर्गीय लिपिकों के स्थानांतरण को लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।









