दुनिया के सिर्फ 16 देशों में महिला राष्ट्राध्यक्ष, जानिए ग्लोबल पॉलिटिक्स में आधी आबादी की कितनी हिस्सेदारी
संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े खोल रहे हैरान करने वाली तस्वीर, संसद से लेकर कैबिनेट तक महिलाओं की हिस्सेदारी अब भी कमजोर, भारत में भी आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले

दुनिया भर में महिलाओं की आबादी लगभग आधी होने के बावजूद राजनीति और सत्ता के शीर्ष पदों पर उनकी भागीदारी अब भी सवालों के घेरे में है। दफ्तर, कॉलेज और सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की सक्रिय भूमिका के बावजूद वैश्विक नेतृत्व संरचना में उनकी मौजूदगी अपेक्षाकृत कम दिखाई देती है।
संयुक्त राष्ट्र के ताजा आंकड़ों के अनुसार 1 जनवरी 2026 तक दुनिया में केवल 28 देश ऐसे हैं, जहां महिलाएं या तो राष्ट्राध्यक्ष (Head of State) या सरकार प्रमुख (Head of Government) के रूप में कार्यरत हैं। इनमें भी केवल 16 देशों में महिलाएं राष्ट्रपति या राष्ट्राध्यक्ष के पद पर हैं, जबकि 21 देशों में महिलाएं प्रधानमंत्री या सरकार प्रमुख की भूमिका निभा रही हैं। यह आंकड़ा वैश्विक राजनीति में लैंगिक असंतुलन को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
कैबिनेट स्तर पर भी स्थिति कुछ खास बेहतर नहीं है। दुनिया भर में केवल 22.4 प्रतिशत मंत्री पदों पर महिलाएं कार्यरत हैं। वहीं सिर्फ 14 देश ऐसे हैं जहां कैबिनेट में महिलाओं की भागीदारी 50 प्रतिशत या उससे अधिक है। इससे साफ होता है कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में अब भी महिलाएं पूरी तरह से बराबरी की स्थिति में नहीं पहुंच पाई हैं।
संसदों में भी तस्वीर मिश्रित है। वैश्विक स्तर पर औसतन 27.5 प्रतिशत सांसद महिलाएं हैं। हालांकि यह 1995 के मुकाबले एक बड़ा सुधार है, जब यह आंकड़ा बेहद कम था। लेकिन इसके बावजूद केवल सात देश ऐसे हैं जहां संसद के निचले सदन में महिलाओं की भागीदारी 50 प्रतिशत या उससे अधिक है। इनमें रवांडा (64%), क्यूबा (57%), निकारागुआ (55%), बोलीविया (51%), अंडोरा (50%), मेक्सिको (50%) और संयुक्त अरब अमीरात (50%) शामिल हैं।
दूसरी ओर, 21 देश ऐसे भी हैं जहां संसद के निचले सदन में महिलाओं की भागीदारी 10 प्रतिशत से भी कम है, और कुछ जगह तो महिला प्रतिनिधित्व लगभग शून्य के बराबर है।
भारत की स्थिति भी इस वैश्विक तस्वीर का हिस्सा है। 18वीं लोकसभा में 543 सांसदों में 74 महिलाएं हैं, जबकि राज्यसभा में 245 सदस्यों में 42 महिलाएं हैं। इसके अनुसार लोकसभा में महिला प्रतिनिधित्व लगभग 13.63 प्रतिशत और राज्यसभा में 17.14 प्रतिशत है। हाल ही में लागू हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत संसद में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की दिशा में कदम बढ़ाया गया है, जिससे भविष्य में स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
स्थानीय शासन स्तर पर भी वैश्विक आंकड़े बताते हैं कि 147 देशों के अध्ययन में केवल 36 प्रतिशत महिलाएं ही स्थानीय निकायों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। इनमें भी सिर्फ दो देश ऐसे हैं जहां बराबरी यानी 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि जिन देशों में महिलाओं के लिए कोटा प्रणाली लागू की गई है, वहां राजनीतिक भागीदारी में स्पष्ट सुधार देखने को मिला है। भारत की पंचायत व्यवस्था इसका एक उदाहरण मानी जाती है, जहां महिलाओं के नेतृत्व वाले क्षेत्रों में पेयजल जैसी बुनियादी परियोजनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार ऐसे क्षेत्रों में ड्रिंकिंग वाटर प्रोजेक्ट्स की संख्या पुरुष नेतृत्व वाली पंचायतों की तुलना में 62 प्रतिशत अधिक पाई गई है।
इन आंकड़ों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब महिलाएं समाज के हर क्षेत्र में बराबरी से आगे बढ़ रही हैं, तो राजनीति और सत्ता के शीर्ष पर यह अंतर अब भी क्यों कायम है।









