झालमुड़ी से भड़की सियासत: पीएम के ‘स्नैक स्टॉप’ ने चुनावी माहौल किया गरम
Politics Over Jhalmuri: PM's 'Snack Stop' Heats Up the Election Atmosphere

झाड़ग्राम। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच एक साधारण सा दृश्य अब बड़े राजनीतिक विवाद में बदल गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा के बाद उनके काफिले का सड़क किनारे एक झालमुड़ी स्टॉल पर रुकना चर्चा का केंद्र बन गया है। इस दौरान उनकी सहज मौजूदगी की तस्वीरें तेजी से वायरल हुईं, लेकिन इसी के साथ सियासी विवाद भी गहरा गया।
टीएमसी का आरोप: सुरक्षा प्रोटोकॉल ने रोका विपक्ष का प्रचार
तृणमूल कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर चुनावी मुद्दा बनाते हुए आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री के दौरे और सुरक्षा प्रोटोकॉल के चलते झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन के कार्यक्रम प्रभावित हुए। पार्टी का दावा है कि हेलीकॉप्टर लैंडिंग की अनुमति नहीं मिलने के कारण सोरेन दंपति को दांतन और केशियाड़ी की सभाएं रद्द करनी पड़ीं।
आदिवासी राजनीति के केंद्र में आया विवाद
यह इलाका आदिवासी बहुल होने के कारण राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है। टीएमसी का कहना है कि यह सिर्फ प्रशासनिक मसला नहीं, बल्कि आदिवासी नेतृत्व को कमजोर करने की कोशिश है। पार्टी इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन के तौर पर पेश कर रही है।
भाजपा की चुप्पी, सुरक्षा एजेंसियों का तर्क
हालांकि भाजपा की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि प्रधानमंत्री जैसे उच्च सुरक्षा वाले पदाधिकारी के दौरे के दौरान क्षेत्र में कड़े प्रतिबंध लगाना अनिवार्य होता है।
छोटी घटना बनी बड़ा चुनावी हथियार
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह मामला दिखाता है कि चुनावी माहौल में छोटी से छोटी घटना भी बड़े मुद्दे में बदल सकती है। झालमुड़ी जैसे आम स्ट्रीट फूड से जुड़ा यह वाकया अब राजनीतिक बयानबाजी का केंद्र बन चुका है।









