JTET भाषा विवाद: सरकार से जवाब तलब! क्या भोजपुरी-मगही की होगी वापसी? 22 मई की बैठक पर टिकीं नजरें

JTET Language Dispute: Government Asked to Respond! Will Bhojpuri and Magahi Be Reinstated? All Eyes on the May 22 Meeting.

रांची: झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा की नई भाषा नियमावली को लेकर राज्य में सियासी और शैक्षणिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस मुद्दे पर गठित पांच मंत्रियों की उच्चस्तरीय कमेटी की अहम बैठक भी किसी अंतिम निर्णय तक नहीं पहुंच सकी। अधिकारियों की ओर से जरूरी आंकड़े और स्पष्ट जानकारी नहीं दिए जाने के कारण कमेटी ने फैसला टालते हुए अगली बैठक 22 मई को बुलाने का निर्णय लिया है।

बैठक वित्त मंत्री Radhakrishna Kishore की अध्यक्षता में हुई, जिसमें भाषा नियमावली के कई बिंदुओं पर गंभीर सवाल उठाए गए।

भोजपुरी, मगही और अंगिका को हटाने पर सरकार से जवाब तलब

बैठक में वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि झारखंड में भोजपुरी और मगही बोलने वालों की संख्या ओड़िया और बांग्ला भाषियों से कई गुना ज्यादा है। इसके बाद कमेटी सदस्यों ने सवाल उठाया कि जब इन भाषाओं का दायरा इतना बड़ा है, तो इन्हें JTET परीक्षा से बाहर क्यों किया गया।

कमेटी ने अधिकारियों से पूछा कि वर्ष 2012 तक भोजपुरी, मगही और अंगिका को JTET में शामिल करने का आधार क्या था और नई नियमावली में इन्हें हटाने के पीछे क्या तर्क है।

सदस्यों ने यह भी कहा कि विभाग के पास इन भाषाओं के अभ्यर्थियों की संख्या और उनके प्रदर्शन से जुड़ा स्पष्ट डेटा तक उपलब्ध नहीं है।

कुरमाली और जनजातीय भाषाओं को लेकर भी बढ़ा विवाद

नई नियमावली में संथाल परगना क्षेत्र में कुरमाली भाषा को शामिल नहीं किए जाने पर भी कमेटी ने नाराजगी जताई। सदस्यों का कहना था कि इस क्षेत्र में लाखों लोग कुरमाली बोलते हैं, इसके बावजूद भाषा को सूची से बाहर रखा गया है।

इसके अलावा असुर और बिरहोर जैसी आदिम जनजातीय भाषाओं को हटाने के फैसले पर भी सवाल उठे। कमेटी ने पूछा कि इन भाषाओं को हटाने का आधार क्या है और इन्हें बोलने वालों की वास्तविक संख्या कितनी है।

कमेटी ने मांगा जिलावार पूरा डेटा

बैठक के दौरान शिक्षा विभाग को निर्देश दिया गया कि अगली बैठक से पहले राज्य के सभी जिलों में बोली जाने वाली भाषाओं का विस्तृत डेटा उपलब्ध कराया जाए।

कमेटी ने भाषाभाषियों की संख्या, विभिन्न भाषाओं के शिक्षकों और विद्यार्थियों का आंकड़ा, तथा पिछली JTET परीक्षाओं में शामिल अभ्यर्थियों का पूरा रिकॉर्ड मांगा है।

इसके साथ ही यह जानकारी भी मांगी गई है कि राज्य में किन भाषाओं की पढ़ाई हो रही है और उन भाषाओं में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या कितनी है।

डेटा नहीं मिलने से फैसला अटका

बैठक के बाद वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि अधिकारियों की ओर से मांगी गई जानकारी का संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उन्होंने साफ कहा कि बिना ठोस आंकड़ों के कमेटी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकती।

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने खुद कैबिनेट बैठक में भोजपुरी, मगही और अंगिका को JTET में शामिल करने की मांग उठाई थी।

बैठक में Deepika Pandey Singh, योगेंद्र प्रसाद, सुदिव्य कुमार, संजय प्रसाद यादव, कार्मिक सचिव प्रवीण टोप्पो और शिक्षा सचिव उमाशंकर सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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