रांची से सामने आए बयान ने महिला आरक्षण के मुद्दे को फिर गरमा दिया है। झारखंड के कैबिनेट मंत्री Irfan Ansari ने केंद्र सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि यह विधेयक महिलाओं को सशक्त करने के लिए नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ के लिए लाया गया है।
राहुल की सोच की जीत, मोदी सरकार पर नैतिक सवाल
डॉ. अंसारी ने इस पूरे घटनाक्रम को कांग्रेस नेता Rahul Gandhi की वैचारिक जीत और प्रधानमंत्री Narendra Modi की नैतिक हार बताया। उन्होंने कहा कि इससे सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
नीयत पर उठे सवाल, देरी को बताया अन्याय
उन्होंने आरोप लगाया कि अगर सरकार वास्तव में महिलाओं को अधिकार देना चाहती, तो आरक्षण अब तक लागू हो चुका होता। जनगणना और परिसीमन का हवाला देकर इसे टालना महिलाओं के साथ अन्याय है।
सब-कोटा की मांग, बिना सामाजिक संतुलन अधूरा आरक्षण
अंसारी ने कहा कि महिला आरक्षण तभी सार्थक होगा जब इसमें एसटी, एससी, ओबीसी और अल्पसंख्यक वर्ग की महिलाओं के लिए अलग से कोटा तय किया जाए। बिना सामाजिक न्याय के यह व्यवस्था अधूरी मानी जाएगी।
लोकतंत्र पर खतरे का दावा, पिछड़ों के हक पर चिंता
उन्होंने 2026 की जनगणना और परिसीमन की शर्त को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया। उनके अनुसार इससे पिछड़े वर्गों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
‘अब जवाब चाहिए, वादे नहीं’
अंसारी ने साफ कहा कि देश की महिलाएं अब केवल वादों से संतुष्ट नहीं होंगी। उन्हें सत्ता में वास्तविक भागीदारी चाहिए और उनकी सरकार इसके लिए संघर्ष जारी रखेगी।
राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत
इस बयान के बाद महिला आरक्षण को लेकर सियासी बयानबाजी और तेज हो गई है। आने वाले समय में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में बना रह सकता है।