झारखंड के युवाओं के लिए खुशखबरी: उच्च शिक्षा में बंपर बहाली, 329 असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति का रास्ता साफ
Good News for the Youth of Jharkhand: Massive Recruitment in Higher Education—Path Cleared for the Appointment of 329 Assistant Professors.

रांची से सामने आई जानकारी के अनुसार, झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा चयनित सहायक आचार्यों को अब नियुक्ति का इंतजार ज्यादा लंबा नहीं करना पड़ेगा। राज्य सरकार मई के पहले सप्ताह में एक बड़े कार्यक्रम के जरिए इन अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपने की तैयारी में है। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूदगी प्रस्तावित है, जिसकी अंतिम मंजूरी मिलते ही तारीख घोषित की जाएगी।
दिसंबर 2025 की अनुशंसा अब जमीन पर उतरेगी
जिन 329 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र मिलने वाला है, उनकी सिफारिश आयोग ने दिसंबर 2025 में की थी। जिला स्तर पर उनकी काउंसिलिंग पूरी हो चुकी है और दस्तावेजों की जांच में सभी योग्य पाए गए हैं। इसी वजह से अब इनकी नियुक्ति प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।
एक हजार और अभ्यर्थी लाइन में: प्रक्रिया जारी
विभाग को करीब एक हजार अन्य उम्मीदवारों की अनुशंसा भी मिल चुकी है। इन अभ्यर्थियों की प्रक्रिया फिलहाल चल रही है। इनके दस्तावेज जिलों को भेजे जा रहे हैं, जहां काउंसिलिंग के बाद आगे की कार्रवाई पूरी की जाएगी।
काउंसिलिंग बनेगी चयन की अंतिम कसौटी
जिला स्तर पर जारी दिशा-निर्देशों के तहत काउंसिलिंग के दौरान सभी प्रमाणपत्रों की गहन जांच की जाएगी। जो अभ्यर्थी इस चरण में सफल होंगे, उन्हें बाद में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में नियुक्ति पत्र सौंपा जाएगा। अनुमान है कि इस दूसरे चरण के उम्मीदवारों को मई के अंत या जून की शुरुआत तक नियुक्ति मिल सकती है।
हजारों पद भरे, फिर भी कई सीटें खाली
अब तक राज्य में 10,213 सहायक आचार्यों की नियुक्ति हो चुकी है और वे विभिन्न स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं। आयोग ने कुल 11,300 अभ्यर्थियों की अनुशंसा की थी, जिनमें से अधिकांश को नियुक्त किया जा चुका है। हालांकि, प्रारंभिक विद्यालयों के लिए तय 26,001 पदों में अभी भी कई जगह खाली हैं। खास तौर पर पारा शिक्षक श्रेणी में योग्य अभ्यर्थियों की कमी के कारण पद भर नहीं पाए हैं।
भर्ती प्रक्रिया पर नजर: आगे क्या होगा
सरकार की कोशिश है कि बाकी पदों को भी जल्द भरा जाए, ताकि स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर हो सके। आने वाले महीनों में यह प्रक्रिया और तेज होने की संभावना है, जिससे शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिल सके।









