पेट्रोल के लिए मारपीट, गैस के लिए सड़कों पर रातें… क्या सब कुछ कंट्रोल से बाहर?
दो दिन पहले साइकिल से ‘पेट्रोल बचाने’ का संदेश देने वाले मंत्री अब बाइक पर दिखे, सपा बोली- आखिर छिपाया क्या जा रहा है?

उत्तर प्रदेश में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस को लेकर मचे हाहाकार के बीच अब सियासत भी गर्म हो गई है। गोरखपुर में पेट्रोल पंप पर मारपीट और लंबी लाइनों की खबरों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच समाजवादी पार्टी ने प्रदेश सरकार और मंत्री सुरेश खन्ना पर तीखा हमला बोला है। सपा ने सवाल उठाया कि आखिर दो दिन पहले पेट्रोल बचाने का संदेश देने वाले मंत्री अब बाइक पर क्यों घूम रहे हैं? क्या प्रदेश में हालात सरकार जितने सामान्य बता रही है, उतने हैं नहीं?
दरअसल, गोरखपुर से पेट्रोल को लेकर अफरा-तफरी और झगड़े की खबर सामने आने के बाद सपा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सरकार को घेरा। पार्टी ने तंज कसते हुए लिखा कि कुछ दिन पहले मंत्री सुरेश खन्ना साइकिल से चल रहे थे और लोगों को पेट्रोल-डीजल बचाने की सीख दे रहे थे। लेकिन अब वही मंत्री बाइक पर सवार नजर आ रहे हैं। सपा ने सवाल उठाया कि आखिर वह साइकिल कहां गायब हो गई, जिसे चलाकर मंत्री संदेश दे रहे थे?
सपा ने इसे सरकार का “दोहरा रवैया” बताते हुए कहा कि एक तरफ जनता पेट्रोल और गैस के लिए परेशान है, दूसरी तरफ सरकार हालात सामान्य बताने में लगी हुई है। पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रदेश के कई जिलों में पेट्रोल-डीजल की कमी से लोग घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं। वहीं रसोई गैस सिलेंडर के लिए भी भारी संकट देखने को मिल रहा है।
पार्टी ने गोरखपुर की उन तस्वीरों का भी जिक्र किया, जिनमें लोग गैस सिलेंडर लेने के लिए सड़क किनारे मच्छरदानी लगाकर रात बिताते नजर आए थे। अब पेट्रोल पंपों पर मारपीट और अफरा-तफरी की खबरों ने लोगों की बेचैनी और बढ़ा दी है। सपा ने कहा कि ये हालात “शर्मनाक, खतरनाक और भयावह” हैं।
समाजवादी पार्टी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी निशाना साधते हुए कहा कि कुछ दिन पहले सरकार विपक्ष पर अफवाह फैलाने का आरोप लगा रही थी और दावा कर रही थी कि सब कुछ सामान्य है। लेकिन अब जमीन पर सामने आ रही तस्वीरें कुछ और ही कहानी बयान कर रही हैं। सपा ने कहा कि अगर सब ठीक था तो आखिर पेट्रोल पंपों पर झगड़े और गैस एजेंसियों के बाहर लंबी लाइनें क्यों लग रही हैं?
प्रदेश में बढ़ती परेशानियों और राजनीतिक बयानबाजी के बीच आम जनता अब यही सवाल पूछ रही है कि आखिर हालात कब सामान्य होंगे और क्या सरकार संकट की असली तस्वीर छिपाने की कोशिश कर रही है?









