AIADMK में बड़ा सियासी भूचाल: 3 बागी विधायकों का इस्तीफा, TVK में शामिल होने की चर्चाओं ने बढ़ाई हलचल

AIADMK में अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आ गई है। पार्टी के तीन बागी विधायकों ने इस्तीफा देकर तमिलनाडु की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। विधानसभा स्पीकर प्रभाकर ने तीनों के इस्तीफे मंजूर भी कर लिए हैं, जिसके बाद अब राज्य में कुल चार विधानसभा सीटें खाली हो चुकी हैं। राजनीतिक गलियारों में इस बात की जोरदार चर्चा है कि ये विधायक जल्द ही TVK का दामन थाम सकते हैं।
इस्तीफा देने वालों में मदुरानंदगम से विधायक मरगदम कुमरवेल, पेरुन्दूरई से विधायक जयकुमार और दारापुरम की विधायक सत्यभामा शामिल हैं। इनमें दो महिला विधायक भी हैं। बताया जा रहा है कि उपचुनाव में ये नेता टीवीके के टिकट पर मैदान में उतर सकते हैं।
राजनीतिक हलकों में हलचल इसलिए भी तेज हो गई है क्योंकि इस्तीफे के बाद इन नेताओं ने मंत्री आधव अर्जुन से मुलाकात की। यही नहीं, ये वही विधायक हैं जिन्होंने विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के दौरान टीवीके सरकार के समर्थन में वोट किया था। इससे उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर अटकलें और मजबूत हो गई हैं।
AIADMK में बढ़ता विद्रोह
पार्टी के भीतर असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। विद्रोही गुट का नेतृत्व एसपी वेलुमणि और सीवी शनमुगम कर रहे हैं। दोनों नेताओं ने पार्टी प्रमुख Edappadi K. Palaniswami की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाए हैं। बागी नेता चाहते हैं कि पलानीस्वामी महासचिव पद छोड़ें ताकि पार्टी में नए नेतृत्व को मौका मिल सके।
2026 तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद पार्टी में यह असंतोष और गहरा गया। 234 सीटों वाली विधानसभा में AIADMK को सिर्फ 47 सीटों पर जीत मिली थी, जिसने पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की मांग को हवा दे दी।
विजय की सरकार को मिल सकती है मजबूती
तमिलनाडु चुनाव में अभिनेता-राजनेता Vijay की पार्टी TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। हालांकि पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। TVK ने 108 सीटें जीती थीं, लेकिन एक सीट विजय द्वारा छोड़े जाने के बाद पार्टी की संख्या 107 रह गई।
इसके बाद कांग्रेस, वीसीके, आईयूएमएल, सीपीआई और सीपीएम के समर्थन से विजय ने सरकार बनाई। फिलहाल सरकार के पास 120 विधायकों का समर्थन है। ऐसे में अगर AIADMK के बागी विधायक आधिकारिक तौर पर TVK में शामिल होकर उपचुनाव जीत जाते हैं, तो विजय सरकार पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे विजय की गठबंधन सहयोगियों पर निर्भरता भी कम होगी और तमिलनाडु की राजनीति में TVK की पकड़ और मजबूत हो जाएगी।









