LPG गैस कनेक्शन के नियमों में बड़ा बदलाव. सरेंडर करने का झंझट खत्म, PNG पर भी बड़ा अपडेट

केंद्र सरकार ने घरेलू गैस उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए एलपीजी नियमों में अहम बदलाव किया है। सोमवार से लागू हुए नए संशोधन के तहत अब घर में Piped Natural Gas कनेक्शन लगवाने पर पुराना Liquefied Petroleum Gas कनेक्शन सरेंडर करने का झंझट खत्म हो गया है।
सरकार ने आधिकारिक रूप से “लिक्विड पेट्रोलियम गैस (आपूर्ति और वितरण का विनियमन) संशोधन आदेश, 2026” लागू कर दिया है। इस नए नियम का मकसद उपभोक्ताओं को ज्यादा सुविधा देना और LPG तथा PNG के बीच आसान बदलाव सुनिश्चित करना बताया गया है।
अब क्या बदला?
नए नियम के मुताबिक, अगर किसी उपभोक्ता ने घर में PNG कनेक्शन लगवा लिया है, तो उसे अपना पुराना LPG कनेक्शन तुरंत बंद नहीं करना पड़ेगा। उपभोक्ता के पास अब दो विकल्प होंगे—
- PNG लगने के 30 दिनों के भीतर LPG कनेक्शन बंद कराने का आवेदन करें।
- या फिर भविष्य में इस्तेमाल के लिए “ट्रांसफर वाउचर” ले लें।
इस ट्रांसफर वाउचर की मदद से उपभोक्ता बाद में किसी ऐसे इलाके में शिफ्ट होने पर अपना LPG कनेक्शन दोबारा सक्रिय करा सकेंगे, जहां PNG सुविधा उपलब्ध नहीं है।
मिडिल क्लास और नौकरीपेशा लोगों को राहत
सरकार का कहना है कि यह फैसला खासतौर पर मिडिल क्लास, ट्रांसफरेबल जॉब वाले कर्मचारियों, किराए के मकानों में रहने वाले परिवारों और छात्रों को ध्यान में रखकर लिया गया है।
अक्सर लोग PNG लगवाने के बाद LPG कनेक्शन सरेंडर कर देते थे और बाद में दूसरे शहर जाने पर उन्हें नया कनेक्शन लेने के लिए सिक्योरिटी डिपॉजिट, दस्तावेज और लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। अब यह परेशानी काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
PNG क्यों बन रही पहली पसंद?
देश के बड़े शहरों में PNG नेटवर्क तेजी से फैल रहा है। इसे LPG सिलेंडर की तुलना में ज्यादा सुरक्षित, सुविधाजनक और किफायती माना जाता है। इसमें सिलेंडर खत्म होने या बुकिंग की परेशानी नहीं रहती और गैस पाइपलाइन के जरिए लगातार सप्लाई मिलती रहती है।
हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि PNG उपलब्ध क्षेत्र में दोनों ईंधनों का एक साथ घरेलू उपयोग रोकने के लिए नए नियम बनाए गए हैं। यानी PNG लगवाने के बाद उपभोक्ता नियमित LPG रीफिल नहीं ले सकेंगे।
सरकार का क्या है उद्देश्य?
सरकार का उद्देश्य शहरों में PNG के उपयोग को बढ़ावा देना और घरेलू LPG के अनावश्यक दोहरे इस्तेमाल को रोकना है। साथ ही, लोगों को भविष्य के लिए विकल्प देकर गैस कनेक्शन से जुड़ी परेशानियां कम करना भी इस फैसले का बड़ा मकसद माना जा रहा है।









