“स्तन पकड़ना, कपड़े उतारने की कोशिश, पजामे का नाड़ा तोड़ना”… कोई रेप नहीं, हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कही ये बात…

"Grabbing the breast, trying to remove the clothes, breaking the string of the pyjama"… no rape, the High Court said this during the hearing...

Highcourt News : “स्तनों को पकड़ना, उसके पाजामे का नाड़ा तोड़ना और उसे पुलिया के नीचे खींचने का प्रयास करना… बलात्कार या बलात्कार के प्रयास का आरोप लगाने के लिए पर्याप्त नहीं है” एक याचिका की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ये बातें कही है। हाईकोर्ट ने ‘अपराध की तैयारी’ और ‘सच में अपराध करने का प्रयास’ करने में अंतर भी बताया है।

 

यह टिप्पणी इलाहबाद हाईकोर्ट के जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की पीठ ने की है। जज द्वारा की गई टिप्पणी सिर्फ एक आरोप नहीं बल्कि इस तरह के कई आरोपों में बार-बार प्रयुक्त की जाती है। इससे पहले भी बॉम्बे हाईकोर्ट की एडिशनल जज पुष्पा गनेडीवाल ने यौन उत्पीड़न के एक आऱोपी को यह कहकर बरी कर दिया था कि कपड़े के ऊपर से स्तन दबाना यौन अपराध के अंतर्गत नहीं आता, आरोपी के ऊपर पॉक्सो एक्ट नहीं लगाया जा सकता है।

 

आरोपियों के नाम पवन और आकाश हैं। हाईकोर्ट ने दो आरोपियों पर निचली अदालत की ओर से लगाए गए आरोपों में बदलाव के आदेश दिए। कासगंज की एक अदालत ने उनको भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 (बलात्कार) और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम की धारा 18 के तहत दर्ज एक मुकदमे में समन किया था।

 

शिकायत के मुताबिक दोनों पर एक नाबालिग लड़की के रेप के प्रयास के आरोप लगे थे। पीड़िता को कुछ राहगीरों ने बचाया था, जिससे आरोपी मौके से भागने पर मजबूर हो गए थे। घटना 2021 की है। आरोपियों ने नाबालिग बच्ची से लिफ्ट देने की बात कही। इसके बाद रेप करने का प्रयास किया। पीड़िता के परिजनों ने शिकायत दर्ज कराई।

 

मामले में याची आकाश ,पवन व अशोक को आइपीसी की धारा 376 और पोक्सो अधिनियम की धारा 18 के तहत मुकदमे का सामना करने के लिए बुलाया गया था। हाई कोर्ट ने निर्देश दिया है कि आरोपितों के खिलाफ धारा 354-बी आइपीसी (निर्वस्त्र करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) के मामूली आरोप के साथ पोक्सो अधिनियम की धारा 9/10 (गंभीर यौन हमला) के तहत मुकदमा चलाया जाए।

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