हफ्ते में सिर्फ एक दिन की ये आदत बना सकती है मौत का कारण! शराब पर नई स्टडी का डराने वाला खुलासा
कम पीने वाले भी खतरे में, एक ही दिन ज्यादा शराब लिवर को कर सकती है बर्बाद; रिसर्च ने तोड़ी बड़ी गलतफहमी

अगर आप यह सोचकर राहत महसूस करते हैं कि हफ्ते भर शराब से दूर रहने के बाद एक दिन खुलकर पी लेना सुरक्षित है, तो अब सावधान हो जाइए। एक नई स्टडी ने इस सोच को पूरी तरह गलत साबित कर दिया है और चेतावनी दी है कि यह आदत आपके लिवर के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है।
अमेरिका की Keck Medicine of USC और University of Southern California के शोधकर्ताओं द्वारा की गई यह स्टडी प्रतिष्ठित जर्नल Clinical Gastroenterology and Hepatology में प्रकाशित हुई है। इसमें बताया गया है कि कभी-कभार भी ज्यादा मात्रा में शराब पीना लिवर डैमेज के खतरे को कई गुना बढ़ा सकता है।
इस रिसर्च का फोकस एक गंभीर बीमारी Metabolic Dysfunction-Associated Steatotic Liver Disease (MASLD) पर था, जो आज तेजी से फैल रही लिवर से जुड़ी समस्याओं में से एक है। इस बीमारी में लिवर में फैट जमा हो जाता है, जिससे सूजन, स्कारिंग और आगे चलकर लिवर फेलियर जैसी गंभीर स्थितियां पैदा हो सकती हैं।
रिसर्च में यह बात सामने आई कि सिर्फ यह मायने नहीं रखता कि आप कितनी शराब पीते हैं, बल्कि यह ज्यादा अहम है कि आप उसे कैसे पीते हैं। यानी अगर कोई व्यक्ति हफ्ते भर की शराब एक ही दिन में पी लेता है, तो उसका लिवर ज्यादा खतरे में होता है।
स्टडी में ‘एपिसोडिक हेवी ड्रिंकिंग’ पर खास ध्यान दिया गया, जिसमें महिलाएं एक दिन में चार या उससे ज्यादा ड्रिंक और पुरुष पांच या उससे ज्यादा ड्रिंक लेते हैं। अगर यह आदत महीने में कम से कम एक बार भी दोहराई जाती है, तो खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
2017 से 2023 के बीच 8,000 से ज्यादा लोगों के डेटा के विश्लेषण में चौंकाने वाले नतीजे सामने आए। जिन लोगों को MASLD था और जो इस तरह की हेवी ड्रिंकिंग करते थे, उनमें एडवांस्ड लिवर फाइब्रोसिस का खतरा करीब तीन गुना ज्यादा पाया गया। यह वह स्थिति है, जब लिवर में स्थायी नुकसान शुरू हो जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एक साथ ज्यादा शराब पीने से लिवर पर अचानक दबाव पड़ता है, जिससे सूजन और गंभीर नुकसान का खतरा बढ़ जाता है। खासकर युवा और पुरुष इस आदत के ज्यादा शिकार पाए गए हैं।
इस स्टडी ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि शराब का सेवन चाहे कम हो या ज्यादा, उसका तरीका ही असली खतरा तय करता है। अब सवाल यह है कि क्या लोग इस चेतावनी को गंभीरता से लेंगे, या फिर यह लापरवाही एक दिन भारी पड़ जाएगी।









