झारखंड हाईकोर्ट में JSSC नियुक्ति विवाद पर सख्त रुख, FIR न होने पर उठे गंभीर सवाल
Jharkhand High Court Takes Strict Stance on JSSC Recruitment Dispute; Serious Questions Raised Over Failure to File FIR

रांची में झारखंड हाईकोर्ट ने माध्यमिक आचार्य नियुक्ति से जुड़े विवाद पर सुनवाई के दौरान सख्त रुख अपनाया। अदालत ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग Jharkhand Staff Selection Commission से यह स्पष्ट करने को कहा कि अब तक इस मामले में एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई है।
2819 अभ्यर्थियों की पुनर्परीक्षा पर विवाद, समान कार्रवाई पर सवाल
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता चंचल जैन ने दलील दी कि 2819 अभ्यर्थियों को एक साथ पुनर्परीक्षा के लिए बाध्य करना पूरी तरह मनमाना है। उनका कहना था कि बिना दोषी और निर्दोष की पहचान किए सभी को एक ही दायरे में लाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
दोषियों की पहचान पहले जरूरी, सभी पर कार्रवाई गलत
सुनवाई के दौरान यह तर्क भी रखा गया कि यदि परीक्षा में अनियमितता हुई है, तो पहले परीक्षा केंद्रों और जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान होनी चाहिए। इसके बाद ही कार्रवाई की जानी चाहिए, न कि सभी अभ्यर्थियों को समान रूप से दंडित किया जाए।
हाईकोर्ट का सख्त सवाल, FIR न होने पर जताई नाराजगी
कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए सीधे पूछा कि अब तक दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई। इस सवाल ने आयोग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर टिप्पणी के संकेत दिए।
याचिका में पुनर्परीक्षा नोटिस को दी गई चुनौती
यह याचिका अर्चना कुमारी और अन्य अभ्यर्थियों द्वारा दायर की गई है। इसमें JSSC के उस नोटिस को चुनौती दी गई है, जिसमें 8 मई को होने वाली पेपर-2 की पुनर्परीक्षा के निर्देश दिए गए हैं।
अगली सुनवाई 27 अप्रैल को, आयोग के रुख पर टिकी नजरें
अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई 27 अप्रैल को निर्धारित की है। अब यह देखना अहम होगा कि आयोग कोर्ट में क्या जवाब देता है और क्या अपने फैसले पर कोई स्पष्टीकरण पेश करता है।








