झारखंड : टेंडर प्रक्रिया पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी…मनमानी पर लगी लगाम, सरकार को दिया स्पष्ट संदेश

Jharkhand: High Court's Stern Remarks on Tender Process... Arbitrary Conduct Curtailed; Clear Message Sent to the Government

Ranchi से एक अहम न्यायिक फैसला सामने आया है, जहां Jharkhand High Court ने सरकारी टेंडर प्रक्रिया को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि राज्य सरकार या उससे जुड़ी एजेंसियां टेंडर प्रक्रिया में अपनी शक्तियों का इस्तेमाल मनमाने तरीके से नहीं कर सकतीं।

टेंडर की शर्तें ‘कानूनी वचन’, इन्हें बदलना आसान नहीं

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि निविदा सूचना में दर्ज शर्तें सिर्फ औपचारिकता नहीं हैं, बल्कि वे एक तरह का कानूनी वचन हैं। इन्हें नजरअंदाज करना या मनमाने ढंग से बदलना नियमों के खिलाफ है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार को टेंडर प्रक्रिया में असीमित अधिकार प्राप्त नहीं हैं और उसका हर निर्णय कानून की सीमाओं के भीतर होना चाहिए।

शर्तों में बदलाव करना है तो देना होगा ठोस कारण

हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि यदि किसी स्थिति में सरकार टेंडर की शर्तों से हटना चाहती है, तो उसे इसके पीछे ठोस और लिखित कारण प्रस्तुत करने होंगे।

सिर्फ प्रशासनिक सुविधा या मनमर्जी के आधार पर शर्तों में बदलाव को अदालत ने अस्वीकार्य और मनमाना बताया।

समान अवसर का सिद्धांत सर्वोपरि, हर बोलीदाता को बराबरी का हक

कोर्ट ने अपने फैसले में समानता के अधिकार को प्रमुख आधार बनाया। अदालत ने कहा कि जब सरकार टेंडर जारी करती है, तो वह सभी बोलीदाताओं को समान अवसर देने का वादा करती है।

अगर प्रक्रिया के बीच में नियम बदले जाते हैं, तो यह न केवल पारदर्शिता को खत्म करता है बल्कि उन कंपनियों के साथ अन्याय भी है, जिन्होंने मूल शर्तों के आधार पर अपनी बोली तैयार की थी।

सरकारी सिस्टम के लिए बड़ा संदेश, पारदर्शिता पर अब और सख्ती

इस फैसले को प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब टेंडर प्रक्रिया में किसी भी तरह की मनमानी या अस्पष्टता पर न्यायिक नजर और सख्त हो सकती है।

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