झारखंड : चाईबासा कोषागार घोटाला…पुलिस खाते से 45 लाख की हेराफेरी, सिपाही गिरफ्तार, सिस्टम पर उठे बड़े सवाल

Jharkhand: Chaibasa Treasury Scam—₹45 Lakh Embezzled from Police Account; Constable Arrested, Major Questions Raised Over the System

झारखंड के चाईबासा से एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है। पुलिस विभाग के खाते से लाखों रुपये की अवैध निकासी का मामला उजागर होने के बाद जांच तेज कर दी गई है। शुरुआती जांच में करीब 45 लाख रुपये की हेराफेरी का खुलासा हुआ है।

फर्जी दस्तावेज और जाली हस्ताक्षर से खेल, धीरे-धीरे निकाले गए लाखों रुपये

मामले की जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने फर्जी बिल, नकली दस्तावेज और जाली हस्ताक्षरों के जरिए किस्तों में बड़ी रकम निकाली। यह पूरा खेल बेहद सुनियोजित तरीके से कई महीनों तक चलता रहा, जिससे शुरुआत में किसी को भनक तक नहीं लगी।

मुख्य आरोपी सिपाही गिरफ्तार, रिश्तेदारों के खातों में भेजे पैसे

इस घोटाले में मुख्य आरोपी सिपाही देव नारायण मुर्मू को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोप है कि उसने निकाली गई रकम का एक हिस्सा अपने परिजनों के बैंक खातों में ट्रांसफर किया। पुलिस को शक है कि इस पूरे खेल में और भी लोग शामिल हो सकते हैं।

ऑडिट ने खोली पोल, सिस्टम की निगरानी पर उठे सवाल

नियमित ऑडिट के दौरान जब खातों का मिलान किया गया तो गंभीर गड़बड़ी सामने आई। इसके बाद पूरे मामले की जानकारी तुरंत उच्च अधिकारियों, उपायुक्त और एसपी को दी गई। जांच टीम गठित कर तीन दिनों में कई अहम खुलासे किए गए, जिससे पूरा घोटाला उजागर हो गया।

कोषागार कर्मियों की भूमिका संदिग्ध, मिलीभगत की आशंका गहराई

जांच में कोषागार से जुड़े दो अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। इससे इस बात की आशंका और मजबूत हो गई है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं बल्कि एक संगठित नेटवर्क का काम हो सकता है।

एक गिरफ्तार, बाकी आरोपी फरार, जांच तेज

पुलिस अधीक्षक के अनुसार एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। अवैध रूप से निकाली गई राशि की बरामदगी के लिए भी प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे घोटाले में कितने लोग शामिल थे और पैसा किन किन खातों तक पहुंचा। पूरी वित्तीय कड़ी को खंगाला जा रहा है।

फिर उठे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल

इस घटना के बाद एक बार फिर सरकारी वित्तीय निगरानी और कोषागार व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। झारखंड में पहले भी ऐसे कई वित्तीय घोटाले सामने आ चुके हैं, जिससे सिस्टम की कमजोरियों को लेकर चिंता बढ़ गई है।

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