रांची प्रशासन में बड़ा विरोधाभास: प्रमोटी IAS के लिए ‘सचिव’ बनना क्यों बन गया सपना?
A Major Contradiction in the Ranchi Administration: Why Has Becoming a ‘Secretary’ Turned into a Distant Dream for Promoted IAS Officers?

रांची। झारखंड की प्रशासनिक व्यवस्था में एक चौंकाने वाली स्थिति सामने आई है, जहां वर्षों का अनुभव रखने वाले प्रमोटी IAS अधिकारियों के लिए सचिव पद तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है। हालात ऐसे हैं कि 45 प्रमोटी IAS अधिकारियों में से केवल एक अधिकारी ही सचिव स्तर तक पहुंच पाया है, जबकि बाकी अधिकारी लंबे इंतजार और देरी का सामना कर रहे हैं।
सिर्फ एक अफसर सचिव पद पर, बाकी इंतजार में
राज्य में वर्तमान स्थिति यह है कि 2007 बैच के मनोज कुमार ही अकेले ऐसे अधिकारी हैं जो सचिव रैंक तक पहुंच सके हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में अधिकारी अलग-अलग स्तरों पर कार्यरत हैं, लेकिन शीर्ष निर्णय लेने वाले पद तक उनकी पहुंच सीमित है।
रैंक के हिसाब से अधिकारियों की स्थिति
झारखंड कैडर में प्रमोटी IAS अधिकारियों की स्थिति कुछ इस प्रकार है:
• सचिव रैंक – 1 अधिकारी
• विशेष सचिव – 16 अधिकारी
• एडिशनल सचिव – 16 अधिकारी
• ज्वाइंट सचिव – 15 अधिकारी
यह आंकड़े साफ बताते हैं कि शीर्ष स्तर पर प्रमोशन का रास्ता बेहद संकरा हो गया है।
प्रमोशन में देरी बनी सबसे बड़ी बाधा
प्रमोटी IAS अधिकारियों को सचिव बनने के लिए कम से कम 16 साल की सेवा पूरी करनी होती है। लेकिन राज्य में पदोन्नति प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी के कारण अधिकारी समय पर इस स्तर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
2011 बैच के अधिकारी, जिन्हें अब तक सचिव बन जाना चाहिए था, वे आज भी विशेष सचिव पद पर ही कार्य कर रहे हैं। इसी तरह 2014 और 2016 बैच के कई अधिकारी एडिशनल सचिव स्तर पर अटके हुए हैं।
अनुभव के बावजूद नहीं मिल पा रहा अवसर
इन अधिकारियों के पास जमीनी प्रशासन का व्यापक अनुभव होता है, क्योंकि वे राज्य प्रशासनिक सेवा से प्रमोट होकर IAS बनते हैं। इसके बावजूद निर्णय लेने वाले उच्च पदों पर उनकी भागीदारी सीमित रह जाती है, जिससे प्रशासनिक संतुलन भी प्रभावित होता है।
‘एवरेस्ट चढ़ने’ जैसा हो गया सचिव बनना
प्रमोटी IAS अधिकारियों के लिए सचिव बनना अब किसी चुनौती से कम नहीं रह गया है। पहले राज्य सेवा से IAS बनने में ही कई साल निकल जाते हैं, और फिर प्रमोशन में देरी के कारण रिटायरमेंट नजदीक आ जाता है।
ऐसे में कई अधिकारी सचिव बनने की पात्रता हासिल करने से पहले ही सेवा से सेवानिवृत्त हो जाते हैं।
क्या है समाधान?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठकें हों और प्रमोशन प्रक्रिया को पारदर्शी व तेज बनाया जाए, तो इस समस्या का समाधान संभव है।
साथ ही, प्रमोटी IAS अधिकारियों को उनके अनुभव के अनुसार जिम्मेदारी और अवसर देने की जरूरत है, ताकि प्रशासनिक दक्षता और संतुलन दोनों मजबूत हो सकें।








