सरकार का सख्त वार! एक झटके में बंद कर दिए 2.5 करोड़ आधार नंबर — कहीं आपका आधार भी तो लिस्ट में नहीं?

नई दिल्ली।
दुनिया की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली आधार को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने ऐसा कदम उठाया है, जिसने लाखों लोगों को चौंका दिया है। सरकार अब तक 2.5 करोड़ से ज्यादा आधार नंबर निष्क्रिय कर चुकी है। ये सभी आधार उन लोगों के नाम पर थे, जिनका निधन हो चुका है, लेकिन पहचान अब भी सिस्टम में “जिंदा” थी।
सरकार का साफ कहना है— अब एक भी फर्जी पहचान बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मृत व्यक्ति का आधार… और जिंदा धोखाधड़ी का खतरा
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि यह अभियान देशभर में लगातार चल रहा है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ सिर्फ वास्तविक और जीवित लोगों तक ही पहुंचे।
सरकार के मुताबिक, किसी व्यक्ति की मौत के बाद अगर उसका आधार नंबर सक्रिय रहता है, तो—
फर्जी बैंक खाते खोले जा सकते हैं
सिम कार्ड लिए जा सकते हैं
सरकारी योजनाओं में गलत तरीके से लाभ उठाया जा सकता है
यानी एक मृत पहचान, सिस्टम के लिए जीता-जागता खतरा बन सकती है।
134 करोड़ आधार, लेकिन डेटा अपडेट रखना बड़ी चुनौती
फिलहाल देश में करीब 134 करोड़ सक्रिय आधार धारक हैं। इतने विशाल डेटाबेस को सटीक और अपडेट रखना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है।
समस्या तब और बढ़ जाती है जब—
मृत्यु का रजिस्ट्रेशन एक जगह होता है
और आधार में दर्ज पता किसी दूसरी जगह का होता है
इसी वजह से अलग-अलग सरकारी डेटाबेस को मिलाकर क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जा रहा है।
आधार की सुरक्षा के लिए हाई-टेक कवच
धोखाधड़ी पर लगाम कसने के लिए सरकार ने आधार सिस्टम में कई तकनीकी बदलाव किए हैं—
बायोमेट्रिक लॉक/अनलॉक की सुविधा
फेस ऑथेंटिकेशन में लाइवनेस डिटेक्शन
डेटा वॉल्ट में एन्क्रिप्शन सुरक्षा
इतना ही नहीं, सरकार ने एक नया आधार ऐप भी लॉन्च किया है, जिससे परिवार के सदस्य आसानी से किसी व्यक्ति के निधन की जानकारी दे सकें।
सरकार का संदेश साफ है
सरकार का कहना है कि ये सभी कदम आधार सिस्टम को
ज्यादा पारदर्शी
ज्यादा सुरक्षित
और ज्यादा विश्वसनीय
बनाने के लिए उठाए गए हैं।
लेकिन सवाल यही है—
अगर समय पर अपडेट न हुआ, तो अगला नंबर किसका बंद होगा?









