गैस सिलेंडर बना मुसीबत, बुकिंग के बाद भी नहीं मिल रही डिलीवरी, कई राज्यों में हालात बेकाबू
25 दिन की समय सीमा भी बेअसर, लोग लाइन में परेशान, कहीं कोयले से खाना बनाने की नौबत

नई दिल्ली। देशभर में एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग और डिलीवरी को लेकर हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं। सरकार की तय समय सीमा के बावजूद कई राज्यों में उपभोक्ताओं को समय पर गैस नहीं मिल पा रही, जिससे लोगों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है।
मौजूदा नियमों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन के भीतर नई बुकिंग की अनुमति है, लेकिन गैस कंपनियां बुकिंग की तारीख को डिलीवरी की तारीख से जोड़ रही हैं। इसका नतीजा यह है कि उपभोक्ताओं को अतिरिक्त 7 से 10 दिन तक और इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे पूरी प्रक्रिया और धीमी हो गई है।
उत्तर प्रदेश के कई जिलों—रायबरेली, बस्ती, कानपुर और प्रयागराज—में सिलेंडर की किल्लत और देरी की शिकायतें सामने आई हैं। शादी के सीजन के चलते कॉमर्शियल सिलेंडर की मांग बढ़ गई है, जबकि सप्लाई सीमित बनी हुई है। प्रयागराज में कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमत 4,600 रुपये से ऊपर पहुंच गई है।
बिहार में भी हालात कुछ बेहतर नहीं हैं। राजधानी पटना में बड़ी संख्या में बुकिंग लंबित हैं। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने कुछ जगहों पर राशन दुकानों के माध्यम से कोयले की सप्लाई शुरू कर दी है, ताकि लोगों को खाना बनाने में राहत मिल सके।
वहीं मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लोग घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं। मैहर में तो लोगों ने विरोध-प्रदर्शन करते हुए सड़क जाम तक कर दी।
राजस्थान में प्रशासन ने शादियों के लिए सिलेंडर लेने पर अतिरिक्त नियम लागू कर दिए हैं। अब आवेदन के साथ शादी का कार्ड देना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर लकड़ी और कोयले के इस्तेमाल की सलाह भी दी जा रही है।
सोशल मीडिया पर भी लोग लगातार अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। सवाल यह उठ रहा है कि जब सरकार ने समय सीमा तय कर दी है, तो फिर जमीनी स्तर पर इसका पालन क्यों नहीं हो पा रहा।
गर्मी और शादी के सीजन के बीच गैस की इस किल्लत ने आम लोगों की रसोई पर सीधा असर डाला है। अगर जल्द ही हालात नहीं सुधरे, तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।









