जज्बे को सलाम…96 घंटे जंगल में मौत से जंग… न खाना, न नेटवर्क, हाथियों के बीच जिंदा बची शरण्या की खौफनाक कहानी

आधा लीटर पानी और टूटती उम्मीदों के बीच जिंदा रही युवती, जंगल से लौटते ही पिता से मिलकर फूट-फूटकर रोई


कर्नाटक के घने जंगलों से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। मदिकेरी के जंगलों में ट्रेकिंग के दौरान लापता हुई शरण्या ने 96 घंटे तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष किया और आखिरकार सुरक्षित बाहर निकल आईं। उनका अपने पिता से मिलते ही फूट-फूटकर रो पड़ना हर किसी की आंखें नम कर गया।

बताया जा रहा है कि शरण्या तडियांडामोल पीक पर ट्रेकिंग के दौरान अपने ग्रुप से बिछड़ गई थीं। वह गुरुवार सुबह करीब 8 बजे ट्रेक के लिए निकली थीं और 12 लोगों के ग्रुप के साथ चढ़ाई शुरू की। सुबह 10:40 बजे चोटी पर पहुंचने के बाद जब वह नीचे उतरने लगीं, तो तेज चलने के कारण अपने साथियों से आगे निकल गईं। जब पीछे मुड़कर देखा तो कोई नजर नहीं आया और यहीं से उनकी मुश्किलों की शुरुआत हो गई।

रास्ता ढूंढने की कोशिश में वह और गहरे जंगल में पहुंच गईं। दोपहर करीब 2:45 बजे उनका मोबाइल फोन भी बंद हो गया। उससे पहले उन्होंने होमस्टे मालिक को फोन कर बताया था कि वह रास्ता भटक गई हैं। इसके बाद उनका संपर्क पूरी तरह टूट गया।

शरण्या के पास उस समय सिर्फ आधा लीटर पानी था और खाने के लिए कुछ भी नहीं था। ऐसे में उन्होंने पास बह रही एक नदी का सहारा लिया और उसी के किनारे चलते हुए चार दिन गुजारे। वह दिन में तीन बार नदी का पानी पीकर खुद को जिंदा रखती रहीं। जंगली जानवरों, खासकर हाथियों के डर के बीच उन्होंने एक सुरक्षित जगह तलाश ली, जहां रात गुजार सकें।

चार रातें उन्होंने जंगल की डरावनी आवाजों के बीच काटीं। हर पल खतरे का अहसास था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। आखिरकार रविवार को स्थानीय लोगों ने उन्हें एक सुनसान इलाके में देखा और रेस्क्यू टीम को सूचना दी। टीम मौके पर पहुंची और शरण्या को सुरक्षित बाहर निकाला।

जैसे ही वह अपने परिवार से मिलीं, उनके पिता ने उन्हें गले लगा लिया और दोनों की आंखों से आंसू बहने लगे। यह भावुक पल सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि मुश्किल हालात में हिम्मत और धैर्य ही सबसे बड़ा सहारा होते हैं। शरण्या की यह 96 घंटे की कहानी न सिर्फ डराने वाली है, बल्कि जज्बे और जिंदादिली की मिसाल भी बन गई है।

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