महिला प्राचार्य गिरफ्तार: एक्सीलेंस स्कूल की प्रिंसिपल घूस लेते रंगे हाथों गिरफ्तार, शिक्षकों से ही ले रही थी रिश्वत, पकड़ाते ही गिड़गिड़ाने लगी, गलती हो गयी माफ कर दीजिये…
Female principal arrested: Excellence school principal arrested red handed while taking bribe, was taking bribe from teachers, as soon as she was caught she started pleading, I made a mistake, please forgive me...

Principle Arrest : स्कूल ऑफ एक्सीलेंड की महिला प्राचार्य को घूस लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि शिक्षकों से महिला प्राचार्य ने रिश्वत की मांग की थी। शिक्षा विभाग में हुई इस कार्रवाई के बाद हड़कंप मचा है। आरोपी प्राचार्य का नाम मनीषा पहाड़िया है। पूरा मामला मध्यप्रदेश के इंदौर शहर का है। इंदौर के शासकीय सांदीपनी मॉडल स्कूल, कछालिया सांवेर की प्रिंसिपल मनीषा पहाड़िया को लोकायुक्त की टीम ने रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया।
प्रिंसिपल पर आरोप है कि उन्होंने दो शिक्षकों से स्थायी नियुक्ति की फाइल जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय भेजने के एवज में 2,000 रुपए की रिश्वत मांगी थी। शिकायत की पुष्टि होते ही लोकायुक्त टीम ने जाल बिछाकर कार्रवाई की।शिकायतकर्ता शिक्षक आशीष मारू (40), जो शासकीय उत्कृष्ट बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पदस्थ हैं, ने लोकायुक्त पुलिस को लिखित शिकायत दी थी।
उन्होंने बताया कि 13 सितंबर 2021 को उनकी नियुक्ति हुई थी और तीन साल का प्रोबेशन पीरियड पूरा होने के बाद 13 सितंबर 2024 को वे स्थायी नियुक्ति के पात्र हो गए। इसी प्रक्रिया में उनकी फाइल संकुल प्रिंसिपल मनीषा पहाड़िया के पास भेजी गई।शिकायत के मुताबिक, प्रिंसिपल ने आशीष मारू और उनके साथी शिक्षक महेश गोयल से एक-एक हजार रुपए रिश्वत की मांग की। प्रिंसिपल ने साफ कहा था कि पैसे उन्हें लिफाफे में रखकर देने होंगे।
लिफाफा जैसे ही हैंडबैग में गया, धर दबोची गईं प्रिंसिपल
लोकायुक्त टीम ने पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी। शिक्षक आशीष मारू और महेश गोयल ने तय योजना के तहत रिश्वत का लिफाफा प्रिंसिपल को सौंपा। प्रिंसिपल ने बिना देर किए लिफाफा अपने हैंडबैग में रख लिया।
जैसे ही दोनों शिक्षक प्रिंसिपल के कक्ष से बाहर निकले, उन्होंने इशारे से लोकायुक्त टीम को सूचना दी। तत्पश्चात टीम ने तुरंत प्रिंसिपल को पकड़ लिया।
टीम ने जब उनके हैंडबैग की तलाशी ली तो रिश्वत का लिफाफा बरामद हुआ। साथ ही, रंग लगाने की प्रक्रिया के दौरान प्रिंसिपल के हाथ रंगीन हो गए, जिससे यह साबित हो गया कि उन्होंने रिश्वत की रकम स्वीकार की है।
प्रिंसिपल की सफाई और कार्रवाई
गिरफ्तारी के बाद प्रिंसिपल ने सफाई देते हुए कहा कि “गलती हो गई”। हालांकि लोकायुक्त ने स्पष्ट कर दिया कि उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम की धारा-7 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
लोकायुक्त एसपी राजेश सहाय ने जानकारी दी कि दोनों शिक्षकों की फाइल 27 जनवरी 2025 को संकुल प्रिंसिपल के पास भेजी गई थी। स्थायी नियुक्ति के लिए यह फाइल आगे डीईओ कार्यालय भेजी जानी थी। लेकिन प्रिंसिपल ने जानबूझकर फाइल को आगे बढ़ाने के बदले रिश्वत मांगी।
लोकायुक्त की सतर्कता
लोकायुक्त की इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि शिक्षा विभाग में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए निगरानी तंत्र सक्रिय है। इस मामले के सामने आने के बाद शिक्षा जगत में हड़कंप मचा हुआ है।स्थानीय लोगों और शिक्षकों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा और ईमानदार शिक्षकों को न्याय मिलेगा।









