झोपड़ी से विधानसभा तक का सफर! बर्तन धोने वाली महिला ने दिग्गजों को हराकर रच दिया इतिहास

ऑसग्राम सीट से कलिता माजी की चौंकाने वाली जीत, 2500 रुपये की कमाई से शुरू हुआ सफर बना लोकतंत्र की मिसाल


नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। ऑसग्राम विधानसभा सीट से एक बेहद साधारण पृष्ठभूमि की महिला ने जीत दर्ज कर न सिर्फ इतिहास रचा, बल्कि यह साबित कर दिया कि हौसला और मेहनत किसी भी कमी को पीछे छोड़ सकते हैं।

कलिता माजी, जो कभी घर-घर जाकर बर्तन धोकर अपना गुजारा करती थीं, आज विधायक बन चुकी हैं। महज 2,500 रुपये महीने की कमाई से परिवार चलाने वाली इस महिला ने तमाम संसाधनों और बड़े राजनीतिक चेहरों को पीछे छोड़ते हुए यह मुकाम हासिल किया है।

भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें ऑसग्राम (एससी) सीट से उम्मीदवार बनाया था और जनता ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें भारी मतों से विजयी बनाया। जानकारी के अनुसार, कलिता माजी ने 12,535 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। उन्हें कुल 1,07,692 वोट मिले, जबकि उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार श्यामा प्रसन्ना लाहौर को हराया।

कलिता पिछले करीब दो दशकों से घरेलू कामगार के रूप में काम कर रही थीं। वे 2-4 घरों में साफ-सफाई और बर्तन मांजने का काम करती थीं और उसी कमाई से अपने परिवार का भरण-पोषण करती थीं। चुनाव के दौरान भी उन्होंने घर-घर जाकर प्रचार किया और लोगों से सीधे जुड़कर समर्थन हासिल किया।

यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने चुनाव लड़ा। इससे पहले भी पार्टी ने उन पर भरोसा जताया था, लेकिन उस वक्त उन्हें करीब 12 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार राजनीति में सक्रिय रहीं।

करीब 10 वर्षों से अधिक समय से राजनीति में सक्रिय कलिता माजी ने अपने सफर की शुरुआत बूथ स्तर की कार्यकर्ता के रूप में की थी। धीरे-धीरे उन्होंने पंचायत चुनावों में भी हिस्सा लिया और अनुभव हासिल किया।

उनकी यह जीत न केवल व्यक्तिगत सफलता की कहानी है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र की उस ताकत को भी दर्शाती है, जहां एक आम इंसान भी अपने दम पर बड़ा मुकाम हासिल कर सकता है।

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