नोएडा बना रणभूमि! पत्थर, आग और आंसू गैस के बीच ‘घिरा’ शहर, सड़कों पर उतरते ही भड़क उठा गुस्सा
महिला श्रमिक को गोली लगने के बाद भड़का आक्रोश, दूसरे दिन भी तनाव बरकरार; पुलिस अलर्ट, कमिश्नर मैदान में

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में श्रमिकों का गुस्सा अब बेकाबू होता नजर आ रहा है। वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर शुरू हुआ विरोध अब हिंसक रूप ले चुका है, जिससे पूरा इलाका दहशत और तनाव के साये में आ गया है।
इस उग्र प्रदर्शन की चिंगारी उस वक्त भड़की, जब इकोटेक-3 थाना क्षेत्र में मिंडा फैक्ट्री के बाहर प्रदर्शन के दौरान एक महिला कामगार को गोली लग गई। इसके बाद से ही श्रमिक लगातार लामबंद होते गए और देखते ही देखते यह विरोध प्रदर्शन बड़े बवाल में बदल गया।
सोमवार को हालात इतने बिगड़ गए कि सड़कों पर उतरे श्रमिकों ने डंडे और पत्थरों के साथ जमकर उत्पात मचाया। जिले के तीन बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में 500 से ज्यादा फैक्ट्रियों और इकाइयों को निशाना बनाया गया। जगह-जगह पथराव और तोड़फोड़ हुई, जबकि पुलिस की गाड़ियों समेत 20 से अधिक वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया।
स्थिति इतनी भयावह हो गई कि एनएच-9 और नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे जैसे अहम रास्ते पूरी तरह जाम हो गए। दिल्ली और गाजियाबाद आने-जाने वाले लोगों को घंटों जाम में फंसे रहना पड़ा। सुबह से शुरू हुआ यह बवाल शाम तक थमता नहीं दिखा, करीब नौ घंटे तक पूरा शहर जैसे थम सा गया।
उपद्रव के दौरान हालात काबू में करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। इस हिंसा में 10 पुलिसकर्मियों समेत करीब 30 लोग घायल हो गए, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
मंगलवार को भी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। हालांकि सुबह से बड़े स्तर पर हिंसा की खबर नहीं आई है, लेकिन तनाव अभी भी बना हुआ है। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पुलिस बल को चप्पे-चप्पे पर तैनात कर दिया गया है। खुद कमिश्नर हालात का जायजा लेने के लिए मौके पर मौजूद हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह गुस्सा जल्द शांत होगा या आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं। फिलहाल नोएडा में हर नजर सड़कों पर टिकी है, जहां सन्नाटे के पीछे अब भी तूफान छिपा हुआ महसूस हो रहा है।









