भव्य रोड शो, मंदिर में पूजा और फिर ऐतिहासिक उद्घाटन…Narendra Modi की 12,000 करोड़ की ‘मेगा चाल’ ने बदली सियासत और सफर की रफ्तार


उत्तर भारत में विकास की रफ्तार को लेकर एक ऐसा कदम उठाया गया है, जिसने न सिर्फ सफर को छोटा कर दिया है, बल्कि सियासी और आर्थिक हलकों में भी हलचल तेज कर दी है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने मंगलवार को दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का उद्घाटन कर एक बड़ा संदेश दे दिया है।

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से शुरू हुए इस दौरे ने उस वक्त भव्य रूप ले लिया, जब पीएम मोदी का रोड शो हजारों लोगों की भीड़ के बीच से गुजरा। सड़कों के दोनों ओर उमड़ी भीड़, हाथों में तिरंगा और गूंजते नारे—पूरा माहौल किसी बड़े उत्सव से कम नहीं दिखा। “मोदी-मोदी” और “भारत माता की जय” के नारों के बीच फूलों की बारिश और पारंपरिक लोक नृत्य ने इस आयोजन को और खास बना दिया।

रोड शो के बाद प्रधानमंत्री देहरादून के पास स्थित Dat Kali Temple पहुंचे, जहां उन्होंने पूजा-अर्चना कर देश की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने आधिकारिक रूप से दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया।

करीब 12,000 करोड़ रुपये की लागत से बना यह 213 किलोमीटर लंबा 6-लेन एक्सप्रेसवे अब दिल्ली से देहरादून के बीच की दूरी को पूरी तरह बदल देगा। जो सफर पहले 6 घंटे या उससे ज्यादा लेता था, वह अब महज ढाई घंटे में पूरा हो सकेगा। इस कॉरिडोर में 10 इंटरचेंज, 3 रेलवे ओवरब्रिज, 4 बड़े पुल और यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस 12 वे-साइड एमिनिटीज बनाई गई हैं।

सिर्फ रफ्तार ही नहीं, इस प्रोजेक्ट में पर्यावरण का भी खास ध्यान रखा गया है। Rajaji National Park के संवेदनशील क्षेत्र को देखते हुए 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया गया है, जो एशिया के सबसे लंबे वन्यजीव गलियारों में गिना जा रहा है। इसके अलावा 8 एनिमल अंडरपास और हाथियों के लिए 2 विशेष रास्ते तैयार किए गए हैं, ताकि जंगल का संतुलन बना रहे।

इस ऐतिहासिक मौके पर केंद्रीय मंत्री Nitin Gadkari, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath समेत कई बड़े नेता मौजूद रहे। सभी ने इस प्रोजेक्ट को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के विकास के लिए ‘गेम चेंजर’ बताया।

लेकिन इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल अब भी हवा में तैर रहा है—क्या यह सिर्फ एक एक्सप्रेसवे है या आने वाले समय में उत्तर भारत की सियासत और अर्थव्यवस्था को पूरी तरह बदलने वाली चाल? क्योंकि रफ्तार सिर्फ सड़कों पर ही नहीं, अब फैसलों में भी साफ नजर आने लगी है।

 

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