ज्येष्ठ माह 2026 बना बेहद खास…अधिकमास ने बढ़ाई अवधि…जानिए पूरे महीने के व्रत और नियम

The Month of Jyeshtha 2026 Becomes Exceptionally Special... The *Adhikmas* Extends Its Duration... Discover the Fasts and Observances for the Entire Month.

रांची : धार्मिक आस्था से जुड़ी बड़ी जानकारी सामने आई है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार ज्येष्ठ माह की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन यह साधारण महीना नहीं है। अधिकमास लगने के कारण इसकी अवधि बढ़ गई है, जिससे यह धार्मिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण बन गया है।

अधिकमास का असर: दो हिस्सों में बंटा ज्येष्ठ माह

इस वर्ष अधिकमास के चलते ज्येष्ठ माह असामान्य रूप से लंबा हो गया है।

  • 16 मई तक कृष्ण पक्ष रहेगा, जिसमें पंचमी तिथि बढ़ने और चतुर्दशी तिथि घटने के कारण 15 दिन का योग बन रहा है
  • 17 मई से 15 जून तक मलमास रहेगा, जिसे शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है
  • इसके बाद 16 जून से शुक्ल पक्ष शुरू होगा, जो द्वितीया तिथि के अभाव में 14 दिनों का रहेगाइस तरह पूरा महीना धार्मिक नियमों और मान्यताओं के लिहाज से बेहद खास हो गया है।

मलमास में क्यों रुकते हैं शुभ काम: जानिए वजह

मलमास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। इसे पूजा, जप, तप और दान के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस अवधि में किए गए आध्यात्मिक कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है।

इन प्रमुख व्रतों पर रहेगी खास नजर

ज्येष्ठ माह में कई महत्वपूर्ण व्रत और पर्व पड़ रहे हैं, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखते हैं:

  • 16 मई: वट सावित्री व्रत और शनि अमावस्या
  • 25 जून: निर्जला एकादशी, जिसे सबसे कठिन व्रतों में गिना जाता है
  • 29 जून: पूर्णिमा व्रत, इस दिन स्नान और दान का विशेष महत्व रहेगा

दक्षिण भारत में इसी दिन वट पूर्णिमा भी मनाई जाएगी।

आठ बड़े मंगल का संयोग: हनुमान भक्तों के लिए खास अवसर

इस बार ज्येष्ठ माह में खास संयोग बन रहा है। हर मंगलवार को पड़ने वाला बड़ा मंगल, जिसे बुढ़वा मंगल भी कहा जाता है, इस बार कुल आठ बार आएगा।

पहला बड़ा मंगल 5 मई को और अंतिम 23 जून को पड़ेगा। इस दिन भगवान हनुमान की पूजा का विशेष महत्व होता है और भक्त बड़ी संख्या में व्रत और पूजा करते हैं।

क्यों खास है यह पूरा महीना

अधिकमास के कारण लंबा हुआ ज्येष्ठ माह न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह साधना और आत्मिक शांति का भी बेहतरीन समय माना जाता है।जो लोग पूजा, दान और व्रत के जरिए अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं, उनके लिए यह पूरा कालखंड बेहद खास अवसर लेकर आया है।

Related Articles

close