झारखंड: महिलाओं को अब 2500 रुपये के साथ सरकार देगी 20000 रुपये, हेमंत सरकार ने कर ली है प्लानिंग, जानिये किस तरह दी जायेगी राशि
Jharkhand: The government will now give women Rs 20,000 in addition to Rs 2,500. The Hemant government has made the planning. Find out how the amount will be given.

झारखंड सरकार मंईयां सम्मान योजना की 50 लाख महिला लाभुकों को स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य सरकार अब बैंकों के माध्यम से 20-20 हजार रुपये का आसान ऋण उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही है, जिसे आगामी बजट में शामिल किया जा सकता है।
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रांची। झारखंड सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य सरकार ने मंईयां सम्मान योजना से जुड़ी करीब 50 लाख महिला लाभुकों को अब स्वरोजगार के लिए बैंकों के माध्यम से 20-20 हजार रुपये का ऋण उपलब्ध कराने की योजना पर गंभीरता से तैयारी शुरू कर दी है। यदि सरकार के प्रयास सफल होते हैं तो इस महत्वाकांक्षी योजना को आगामी बजट में शामिल किया जा सकता है।
राज्य सरकार का उद्देश्य केवल मासिक सहायता तक सीमित न रहकर महिलाओं को स्थायी आय के साधनों से जोड़ना है। फिलहाल मंईयां सम्मान योजना के तहत लाभुक महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। इसी राशि को आधार बनाकर सरकार महिलाओं को छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहती है, ताकि वे स्वयं का रोजगार खड़ा कर सकें।
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की अध्यक्षता में बैंकों के प्रतिनिधियों के साथ इस योजना को लेकर अहम बैठक हुई। बैठक में मौजूद सभी बैंक प्रतिनिधियों ने योजना के क्रियान्वयन में सहयोग देने पर सहमति जताई और कहा कि वे अपने वरीय प्रबंधन से शीघ्र अनुमति प्राप्त कर लेंगे। इससे सरकार को योजना को जमीन पर उतारने में बड़ी राहत मिली है।
बैठक के दौरान वित्त मंत्री ने प्रस्ताव रखा कि ऋण की किस्त की अदायगी महिलाओं को मिलने वाली मंईयां सम्मान राशि से ही की जा सकती है। इससे महिलाओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा और ऋण चुकाने में भी आसानी होगी। उन्होंने कहा कि इस सहायता राशि को सूक्ष्म व्यवसाय के लिए पूंजी में बदला जा सकता है, जिससे महिलाएं छोटे स्तर पर दुकान, सिलाई, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण या अन्य घरेलू उद्योग शुरू कर सकें।
सूत्र बताते हैं कि इस योजना को औपचारिक रूप से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस यानी 8 मार्च को लॉन्च करने का प्रस्ताव रखा गया है। इस योजना को लेकर मुख्यमंत्री की सहमति भी बताई जा रही है, जबकि योजना के नाम को लेकर मुख्यमंत्री के साथ विमर्श किया जाएगा।
ऋण अदायगी की समय-सीमा को लेकर भी विचार-विमर्श चल रहा है। वित्त मंत्री ने बैंकों से आग्रह किया है कि 12 से 24 महीने के भीतर ऋण चुकाने का विकल्प रखा जाए।
इसके अलावा यह भी प्रस्ताव है कि यदि कोई लाभुक समय पर ऋण चुका देती है, तो बैंक भौतिक सत्यापन के बाद उसकी ऋण सीमा बढ़ाकर 50,000 रुपये तक कर सकते हैं। ब्याज दर को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के मानकों के अनुरूप रखने पर भी विचार किया जा रहा है।
इस योजना की खास बात यह होगी कि महिलाओं को दस्तावेजों के झंझट से मुक्त रखा जाएगा। वित्त मंत्री ने बैंकों से कम से कम दस्तावेजों पर ऋण उपलब्ध कराने का आग्रह किया है।
प्रस्ताव के अनुसार, केवल आधार कार्ड अनिवार्य दस्तावेज होगा और दस रुपये के रेवेन्यू स्टांप पर आवेदन के आधार पर ऋण स्वीकृत किया जा सकेगा। साथ ही, आवेदन के सात दिनों के भीतर पूरी प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।









