लापता मासूम पर हाई कोर्ट सख्त, सात साल बाद भी खाली हाथ पुलिस तो CBI जांच के संकेत
High Court Takes Strict Stance on Missing Child Case; Signals CBI Probe as Police Remain Empty-Handed Even After Seven Years

गुमला जिले की 6 वर्षीय लापता बच्ची के मामले ने एक बार फिर न्याय व्यवस्था का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। बच्ची की मां चंद्रमुनि उराइन द्वारा दाखिल हेबियस कॉर्पस याचिका पर झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत का रुख काफी सख्त नजर आया। न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने इस मामले की धीमी जांच पर गंभीर नाराजगी जताई।
सात साल की जांच पर उठे गंभीर सवाल, अफसरों को अदालत में पेश होने का आदेश
सुनवाई के दौरान अदालत ने 2018 से अब तक इस केस से जुड़े सभी पुलिस अधीक्षकों और जांच अधिकारियों को तलब करने का आदेश दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि इतने लंबे समय के बाद भी कोई ठोस सुराग न मिलना बेहद चिंताजनक है। पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हुए अदालत ने जांच की गति और दिशा दोनों पर असंतोष जताया।
CBI जांच की चेतावनी, राज्य सरकार को दिया कड़ा संदेश
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट संकेत दिया कि यदि जल्द ही मामले में प्रगति नहीं हुई, तो जांच केंद्रीय एजेंसी CBI को सौंपी जा सकती है। अदालत का मानना है कि सात वर्षों के बाद भी नतीजा शून्य रहना यह दर्शाता है कि अब किसी उच्च स्तरीय जांच की जरूरत है।
अगली सुनवाई 9 जून को, फैसले पर टिकी सबकी नजरें
मामले की अगली सुनवाई 9 जून को तय की गई है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पुलिस इस दौरान कोई ठोस प्रगति दिखा पाएगी या फिर यह मामला CBI के हवाले हो जाएगा।









