बिहार में सत्ता बदलते ही पलट गया बड़ा फैसला: हड़ताली कर्मचारियों पर सख्ती खत्म, अब खुलने जा रहा है नया खेल?
पूर्व डिप्टी सीएम के आदेश पर चली थी कार्रवाई, अब CM सम्राट चौधरी ने दी राहत; भ्रष्टाचार और हड़ताल के बीच फंसा पूरा सिस्टम

Bihar की सियासत में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है, जहां नए मुख्यमंत्री Samrat Choudhary ने अपने ही सरकार के पुराने फैसले को पलटते हुए बड़ा कदम उठा लिया है। इस फैसले ने प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज कर दी है।
दरअसल, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने उन राजस्व कर्मचारियों को बड़ी राहत देने का ऐलान किया है, जो पिछले करीब ढाई महीने से निलंबन झेल रहे थे। अब इन सभी कर्मचारियों का सस्पेंशन रद्द किया जाएगा। यह वही कर्मचारी हैं, जो अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से हड़ताल पर डटे हुए थे।
गौरतलब है कि 14 अप्रैल तक विभाग का जिम्मा संभाल रहे पूर्व डिप्टी सीएम Vijay Kumar Sinha ने इन हड़ताली कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की थी। कई जिलों में कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया था और उनके खिलाफ एफआईआर तक दर्ज करने के आदेश दिए गए थे।
लेकिन अब नए मुख्यमंत्री के इस फैसले ने पूरी तस्वीर बदल दी है। इसे सरकार के बदले रुख के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे एक तरफ कर्मचारियों को राहत मिली है, तो दूसरी तरफ कई सवाल भी खड़े हो गए हैं।
दरअसल, हाल के दिनों में बिहार के कई जिलों, खासकर अररिया और पूर्णिया में राजस्व कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे। निगरानी विभाग ने कई मामलों में कर्मचारियों को 15,000 रुपये या उससे अधिक की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा था। इसके बाद पटना और अन्य जिलों में कई कर्मचारियों को बर्खास्त भी किया गया था।
सरकार ने इन मामलों में “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाते हुए सख्ती दिखाई थी, लेकिन अब हड़ताली कर्मचारियों को राहत देने के फैसले ने उस सख्त रुख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजस्व कर्मचारी संघ, संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले 17 सूत्री मांगों को लेकर आंदोलन कर रहा है। इनमें 2800 ग्रेड पे और गृह जिले में पदस्थापन जैसी प्रमुख मांगें शामिल हैं। हड़ताल के चलते दाखिल-खारिज और परिमार्जन जैसे लाखों मामले लंबित हो गए हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
हालांकि सरकार ने कर्मचारियों के पदनाम में बदलाव को लेकर सहमति जता दी है, लेकिन हड़ताल पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार का यह नरम रुख हालात सुधारता है या फिर किसी नए विवाद को जन्म देता है।









