दुनिया जंग में उलझी…भारत ने चुपचाप चला दिया बड़ा दांव….फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से खुलेंगे नए रास्ते…व्यापार, नौकरी और निवेश में आ सकता है बड़ा बदलाव

नई दिल्ली। एक तरफ मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है, वहीं दूसरी तरफ भारत इस अनिश्चित माहौल में भी अपने आर्थिक कदम तेजी से आगे बढ़ा रहा है। वैश्विक संकट के बीच भारत अब एक और बड़ी डील की ओर बढ़ चुका है, जो आने वाले समय में कई समीकरण बदल सकती है।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर 27 अप्रैल को हस्ताक्षर होने जा रहे हैं। इस समझौते को दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्तों में एक अहम मोड़ माना जा रहा है। मार्च 2025 में इस दिशा में बातचीत शुरू हुई थी और अब यह समझौता अंतिम चरण में पहुंच चुका है।
न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने इसे एक बड़ी आर्थिक उपलब्धि बताते हुए कहा है कि इस डील से उनके देश के निर्यातकों को भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार तक सीधी पहुंच मिलेगी। हालांकि न्यूजीलैंड की राजनीति में इस समझौते को लेकर मतभेद भी सामने आए हैं, लेकिन विपक्षी दलों ने भी भारत के साथ इस कदम का समर्थन किया है।
यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट केवल वस्तुओं के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें निवेश, सेवाएं और कृषि सहयोग जैसे कई अहम क्षेत्र शामिल होंगे। मौजूदा समय में दोनों देशों के बीच व्यापार तेजी से बढ़ रहा है। 2023-24 में जहां व्यापार 873 मिलियन डॉलर था, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 1.3 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है।
भारत से न्यूजीलैंड को निर्यात में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है। सेवाओं के क्षेत्र में खासतौर पर आईटी, यात्रा और प्रोफेशनल सर्विसेज में भारत की पकड़ मजबूत होती जा रही है।
इस समझौते से भारत को कई बड़े फायदे मिल सकते हैं। आईटी और प्रोफेशनल सेवाओं के लिए न्यूजीलैंड का बाजार खुल सकता है, जिससे भारतीय कंपनियों को विस्तार का मौका मिलेगा। फार्मास्यूटिकल्स और टेक्सटाइल सेक्टर को भी राहत मिलने की संभावना है। साथ ही भारतीय युवाओं के लिए न्यूजीलैंड में पढ़ाई और रोजगार के नए अवसर बन सकते हैं।
दूसरी ओर न्यूजीलैंड को भारत जैसे बड़े बाजार में अपने डेयरी, फल, मांस और वाइन जैसे उत्पादों की पहुंच बढ़ाने का अवसर मिलेगा। शिक्षा और पर्यटन क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ सकता है।
इतिहास के पन्नों में भी दोनों देशों के रिश्ते गहरे रहे हैं। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान गैलीपोली अभियान और द्वितीय विश्व युद्ध में एल अलामीन जैसी लड़ाइयों में दोनों देशों की सेनाएं साथ लड़ी थीं। आज भी न्यूजीलैंड में करीब तीन लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो वहां की अर्थव्यवस्था और समाज का अहम हिस्सा हैं।
ऐसे समय में जब दुनिया अनिश्चितता और संघर्ष के दौर से गुजर रही है, भारत का यह कदम न केवल आर्थिक मजबूती की ओर इशारा करता है, बल्कि यह भी बताता है कि वैश्विक उथल-पुथल के बीच भी देश अपने हितों को साधने में पीछे नहीं हट रहा।









