CRIME BREAKING: 24 घंटे में बिक जाते थे नवजात… 4 राज्यों में फैला खौफनाक जाल…ऑपरेशन देव में खुला बच्चों के सौदे का काला सच…
चार साल के मासूम के अपहरण से शुरू हुई जांच ने खोला रूह कंपा देने वाला नेटवर्क, 8 बच्चों की तस्करी की पुष्टि, मास्टरमाइंड मुरुगन गिरफ्तार

गुजरात। एक मासूम के अपहरण से शुरू हुई जांच ने ऐसा खौफनाक सच उजागर किया है, जिसने हर किसी को अंदर तक झकझोर कर रख दिया है। गुजरात पुलिस के ‘ऑपरेशन देव’ ने बच्चों की तस्करी के उस संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जहां नवजात बच्चों को जन्म के महज 24 से 48 घंटे के भीतर ही बेच दिया जाता था।
इस सनसनीखेज मामले की शुरुआत चार साल के बच्चे देव के अपहरण से हुई। पुलिस को शुरू में यह एक सामान्य किडनैपिंग केस लगा, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, परत दर परत एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा होता चला गया।
पुलिस को एक नाबालिग से मिली अहम जानकारी ने पूरे ऑपरेशन की दिशा बदल दी। इसके बाद तकनीकी साक्ष्यों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स की मदद से पुलिस ने तेलंगाना के कागजनगर से इस गिरोह के मास्टरमाइंड मुरुगन को दबोच लिया। इसके साथ ही करीमनगर से तिरुपति, मल्लैया और गंगाधर को भी गिरफ्तार किया गया।
जांच में सामने आया है कि यह गिरोह गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना और दिल्ली सहित चार राज्यों में फैला हुआ था और बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गिरोह नवजात बच्चों को जन्म के कुछ ही घंटों के भीतर बेच देता था, ताकि कोई सुराग न मिल सके।
अब तक की जांच में कम से कम 8 बच्चों को इस तरह बेचने की पुष्टि हो चुकी है, हालांकि पुलिस को आशंका है कि असल संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। इस पूरे रैकेट में मुरुगन की पत्नी कृष्णावेणी की भी भूमिका सामने आई है, जिसे भी आरोपी बनाया गया है।
पुलिस ने इस नेटवर्क की एक अहम कड़ी तब पकड़ी, जब एक आरोपी को बस में बच्चे को ले जाते हुए गिरफ्तार किया गया। इसी गिरफ्तारी के बाद इस पूरे सिंडिकेट के तार एक-एक कर सामने आते गए।
फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और यह आशंका जताई जा रही है कि इस गिरोह के तार देश के अन्य राज्यों तक भी जुड़े हो सकते हैं। आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
‘ऑपरेशन देव’ ने एक ऐसे काले सच को उजागर किया है, जो समाज के लिए गंभीर चेतावनी है। यह मामला सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि मासूम जिंदगियों के साथ हो रहे अमानवीय सौदे की भयावह तस्वीर है।









