JET परीक्षा हाईकोर्ट में : 18 अप्रैल को हाईकोर्ट करेगा सुनवाई, विषयों को शामिल करने को लेकर दी गयी है चुनौती, जानिये क्या है दलील…

JET Exam in High Court: High Court to Hear Case on April 18; Inclusion of Subjects Challenged—Find Out What the Arguments Are...

झारखंड हाईकोर्ट में JET 2024 में लाइब्रेरी साइंस और फिजिकल एजुकेशन विषय शामिल करने की मांग पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 18 अप्रैल तय की है, जबकि याचिकाकर्ताओं ने समान अवसर की दलील दी है। इस सुनवाई में अभ्यर्थियों की नजर टिकी है।

 

 

रांची। झारखंड हाईकोर्ट में झारखंड एलिजिबिलिटी टेस्ट (JET) 2024 से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले पर आंशिक सुनवाई हुई। यह मामला लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस तथा फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स जैसे विषयों को परीक्षा में शामिल करने की मांग से जुड़ा हुआ है। अदालत ने इस मामले की अगली विस्तृत सुनवाई के लिए 18 अप्रैल की तारीख निर्धारित की है।

 

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता राजेश कुमार और गुलशन कुमार की ओर से दलील दी गई कि उनकी मांग किसी विशेष लाभ के लिए नहीं, बल्कि “equal opportunity” यानी समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए है। उनका कहना है कि जिन अन्य विषयों को JET में शामिल किया गया है, उनमें न्यूनतम योग्यता Masters Degree के साथ NET या JET निर्धारित है। इसी प्रकार की योग्यता इन दोनों विषयों के लिए भी लागू होती है।

 

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को यह भी बताया कि संबंधित विषयों में बड़ी संख्या में पद रिक्त पड़े हुए हैं, खासकर लाइब्रेरियन के पद। ऐसे में इन विषयों को परीक्षा से बाहर रखना न केवल अनुचित है, बल्कि योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय भी है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जब राज्य खुद JET परीक्षा आयोजित कर रहा है, तो बिना ठोस कारण के कुछ विषयों को exclude करना किस हद तक उचित है।

 

वहीं, राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में पक्ष रखते हुए कहा गया कि JET में विषयों का चयन एक “policy decision” है और इसमें सरकार को निर्णय लेने का अधिकार है। सरकार ने यह भी तर्क दिया कि अभ्यर्थियों के लिए UGC NET परीक्षा का विकल्प पहले से उपलब्ध है, जिससे वे अपनी योग्यता साबित कर सकते हैं।

 

हालांकि, इस पर याचिकाकर्ताओं ने जवाब दिया कि NET परीक्षा सभी विषयों के लिए उपलब्ध है, लेकिन जब राज्य स्तर पर JET आयोजित की जा रही है, तो उसमें समान अवसर देना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य द्वारा कुछ विषयों को बाहर रखना transparency और fairness के सिद्धांतों के खिलाफ है।

 

गौरतलब है कि इससे पहले भी अदालत ने राज्य सरकार से पूछा था कि इन विषयों को JET की सूची में शामिल क्यों नहीं किया गया। इसके जवाब में सरकार ने कहा था कि JET मुख्य रूप से teaching posts के लिए आयोजित परीक्षा है और लाइब्रेरियन जैसे पद non-teaching category में आते हैं।

 

साथ ही, सरकार ने यह भी बताया कि लाइब्रेरियन पदों के पुनर्गठन (restructuring) की प्रक्रिया जारी है, इसलिए फिलहाल इन विषयों को शामिल नहीं किया गया।फिलहाल इस पूरे मामले पर अंतिम फैसला आना बाकी है। अब 18 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकेगा कि इन विषयों को JET 2024 में शामिल किया जाएगा या नहीं।

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