बड़ी खबर- महिला आरक्षण बिल सदन में नहीं हो सका पारित, सरकार को 352 के बजाय मिले सिर्फ 298 वोट, विपक्ष में पड़े 230 वोट
Breaking News: Women's Reservation Bill Fails to Pass in the House; Government Secures Only 298 Votes Instead of 352, While 230 Votes Are Cast Against It.

Women Reservation Bill । आधी आबादी की सपना टूट गया है। महिला आरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक सदन में पारित नहीं हो पाया। विधेयक को लेकर हुई वोटिंग में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। लोकसभा में इन बिलों को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका, जिसके चलते तीनों विधेयक गिर गए। इस घटनाक्रम के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है।
दरअसल लोकसभा में हुए मत विभाजन के दौरान कुल 528 वोट पड़े। संविधान संशोधन बिल पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी कम से कम 352 मतों की जरूरत थी। जबकि, बिल के पक्ष में केवल 298 वोट ही पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया। इस प्रकार आवश्यक संख्या से कम समर्थन मिलने के कारण बिल पारित नहीं हो सका।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मतदान के परिणाम घोषित करते हुए स्पष्ट किया कि बिल को अपेक्षित बहुमत नहीं मिला है, इसलिए इसे पारित नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि यह विधेयक विचार के स्तर पर ही गिर गया है और इस पर आगे की कार्यवाही संभव नहीं है। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी शेष दो संबंधित विधेयकों को आगे न बढ़ाने की घोषणा कर दी।
इस घटनाक्रम के बाद संसद परिसर में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की महिला सांसदों ने विपक्ष के खिलाफ प्रदर्शन किया। यह विरोध प्रदर्शन संसद के मकर द्वार से शुरू हुआ। इसके साथ ही एनडीए से जुड़े दलों ने घोषणा की है कि वे 18 अप्रैल से इंडिया ब्लॉक के नेताओं के आवास के बाहर भी विरोध प्रदर्शन करेंगे।
इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने संसद में कहा कि देश के अलग-अलग संसदीय क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या में भारी असमानता है। कुछ क्षेत्रों में जहां मतदाताओं की संख्या 49 लाख तक है, वहीं कुछ जगहों पर यह संख्या मात्र 60 हजार है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी आबादी वाले क्षेत्रों में सांसद अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कैसे कर सकते हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने परिसीमन की आवश्यकता पर जोर दिया।
वहीं, विपक्ष की ओर से कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में पारित महिला आरक्षण विधेयक को लागू करने में देरी के संकेत पहले ही मिल चुके थे। उनके अनुसार, वर्तमान प्रस्ताव के जरिए असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया के पीछे राजनीतिक उद्देश्य छिपे हैं और इसके जरिए देश के चुनावी नक्शे में बदलाव करने की योजना हो सकती है।
महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर बिल का गिरना राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। इससे एक ओर जहां महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को लेकर बहस तेज हो गई है, वहीं दूसरी ओर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है।








