हाईकोर्ट का बड़ा प्रहार: माओवादी नेटवर्क से जुड़े आरोपी को राहत देने से इनकार, जेल की सलाखों के पीछे ही कटेगी रातें

High Court issues major blow: Refusal to grant relief to accused linked to Maoist network, will spend nights behind bars

Jharkhand High Court : ने प्रतिबंधित नक्सली संगठन CPI (Maoist) से संबंध रखने के आरोप में गिरफ्तार आरोपी प्रभु प्रसाद साहू उर्फ प्रभु साहू की जमानत याचिका खारिज कर दी है। Jharkhand High Court ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया।

यह फैसला न्यायमूर्ति Rangan Mukhopadhyay और न्यायमूर्ति Pradeep Kumar Srivastava की खंडपीठ ने सुनाया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि आरोप गंभीर हैं, इसलिए फिलहाल आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती। हालांकि अदालत ने निचली अदालत को निर्देश दिया कि मामले की सुनवाई को यथासंभव तेजी से आगे बढ़ाया जाए।

दरअसल, आरोपी ने पहले NIA Special Court Ranchi में जमानत याचिका दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। इसके बाद 26 नवंबर 2025 को उसने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।

यह मामला Garoo थाना कांड संख्या 32/2017 से जुड़ा है, जिसकी जांच बाद में National Investigation Agency को सौंप दी गई थी। अभियोजन के अनुसार 31 अगस्त 2017 को पुलिस को सूचना मिली थी कि प्रभु साहू माओवादी संगठन के केंद्रीय कमेटी सदस्य सुधाकरन का समर्थक है और वह माओवादियों को हथियार, गोला-बारूद और अन्य लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराता था।

जांच के दौरान आरोपी की निशानदेही पर जंगल क्षेत्र से 7.62 एमएम की 13 जिंदा गोलियां, माओवादी साहित्य और अन्य सामग्री बरामद की गई थी। एनआईए का दावा है कि आरोपी वर्ष 1999 से माओवादी संगठन की मदद कर रहा था और ठेकेदारों से लेवी वसूली कर संगठन को आर्थिक सहायता भी पहुंचाता था।

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