झारखंड: ओबीसी छात्रवृत्ति के मुद्दे पर सदन गरमाया, जयराम महतो ने पूछा, अगर केंद्र ने पैसा नहीं दिया, तो छात्रवृत्ति मिलेगी या नहीं, मंत्री ने देरी की बतायी ये वजह…
Jharkhand: The House heated up over the issue of OBC scholarships. Jairam Mahto asked if the scholarships would be given if the Centre did not provide the money. The Minister gave the reason for the delay.

रांची। विधानसभा का बजट सत्र आज ओबीसी छात्रों की लंबित छात्रवृत्ति के मुद्दे पर गरमाया। डुमरी विधायक Jairam Mahato ने गुरुवार को इस विषय पर सरकार से जवाब मांगा कि छात्रवृत्ति राशि का भुगतान कब होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि राशि नहीं मिलने से हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने इसे केवल वित्तीय नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर प्रश्न बताया।
जयराम महतो ने कहा कि छात्रवृत्ति का समय पर भुगतान न होने से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। कई छात्रों को फीस, किताबें और अन्य शैक्षणिक खर्चों को लेकर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से पूछा कि आखिर छात्रों को उनकी छात्रवृत्ति राशि कब तक मिलेगी और भुगतान में लगातार हो रही देरी के लिए कौन जिम्मेदार है।
विधायक जयराम महतो के सवाल पर कल्याण मंत्री Chamara Linda ने जवाब दिया कि केंद्र सरकार से केंद्रांश की राशि प्राप्त नहीं होने के कारण राज्यांश जारी नहीं किया जा सका है। मंत्री ने बताया कि वित्त विभाग के एक संकल्प के अनुसार, केंद्रांश मिलने से पहले राज्यांश की निकासी संभव नहीं है। इसी प्रक्रिया संबंधी बाध्यता के चलते छात्रवृत्ति भुगतान में विलंब हुआ है।
हालांकि मंत्री ने स्वीकार किया कि भुगतान में देरी हुई है और यह समस्या प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़ी है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार इस मुद्दे के समाधान के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर गंभीरता से विचार कर रही है। वित्त विभाग के उस संकल्प में शिथिलता लाने पर मंथन चल रहा है, जिसमें केंद्रांश प्राप्त होने से पहले राज्यांश जारी करने पर रोक है।
यदि इस नियम में ढील दी जाती है, तो राज्यांश की राशि जारी कर छात्रों को जल्द राहत दी जा सकेगी।
सदन में बहस के दौरान जयराम महतो ने सुझाव दिया कि जब तक छात्रवृत्ति राशि जारी नहीं होती, तब तक छात्रों को ब्याज रहित ऋण उपलब्ध कराया जाए या विधायक निधि से अस्थायी सहायता दी जाए, ताकि उनकी शिक्षा बाधित न हो।
हालांकि, मंत्री चमरा लिंडा ने इस प्रस्ताव को असंभव बताते हुए कहा कि ऐसी व्यवस्था व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने दोहराया कि समाधान वित्तीय प्रक्रिया में आवश्यक शिथिलता लाने से ही संभव है।
आपको बता दें कि ओबीसी छात्रवृत्ति का यह मुद्दा राज्यभर के हजारों विद्यार्थियों से जुड़ा है। छात्र और उनके अभिभावक लंबे समय से भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ऐसे में सदन में हुई चर्चा के बाद अब सबकी निगाह राज्य सरकार के आगामी फैसले पर टिकी है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वित्तीय नियमों में कब और किस प्रकार बदलाव किए जाते हैं, ताकि लंबित छात्रवृत्ति राशि का भुगतान सुनिश्चित हो सके।









