नीतीश कुमार कब देंगे इस्तीफा : नीतीश कुमार के पोस्ट से क्यों हो रहा है जेडीयू नेताओं को शक, तोड़फोड़, रोना धोना….सीएम हाउस के बाहर मचा है बवाल
When will Nitish Kumar resign? Why is Nitish Kumar's post causing suspicion, vandalism, and wailing among JDU leaders? Chaos outside the CM House.

करीब दो दशक तक बिहार की सत्ता संभालने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस्तीफा देंगे। राज्यसभा जाने के ऐलान के बाद बिहार की राजनीति में घमासान मचा है। इधर नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले को लेकर चर्चाएं तेज है कि, नीतीश कुमार को जबरदस्ती राज्यसभा भेजा जा रहा है।
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Nitish Kumar Resign for CM Post: पक्का हो गया है कि बिहार में अब सरकार बदलेगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ उनका पूरा मंत्रिमंडल इस्तीफा देगा। खबर ये भी आ रही है कि 10 अप्रैल के पहले कभी भी मुख्यमंत्री इस्तीफा देंगे और फिर बीजेपी से कोई नया मुख्यमंत्री बनेगा। मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने स्वयं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट लिखकर राज्यसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की।

उन्होंने लिखा कि संसदीय जीवन की शुरुआत से ही उनकी इच्छा रही है कि वे बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के भी दोनों सदनों के सदस्य बनें। इसी क्रम में वे इस बार राज्यसभा सदस्य बनने की इच्छा रखते हैं। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार की नई सरकार को उनका समर्थन जारी रहेगा।
जानकारी के अनुसार विधानसभा में नीतीश कुमार, रामनाथ ठाकुर, निशांत और मनीष वर्मा का नॉमिनेशन रिसीप्ट कट चुका है और मुख्यमंत्री आज विधानसभा पहुंचकर औपचारिक रूप से नामांकन दाखिल कर सकते हैं। लगभग 20 वर्षों तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार का यह निर्णय राज्य की सियासत में ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है।
हालांकि उनके इस फैसले को जेडीयू के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सहजता से स्वीकार नहीं किया है। पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। जेडीयू नेता रंजन पटेल ने भावुक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पास रोने के सिवा कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाने के लिए लाठीचार्ज और मारपीट तक झेली, घर-घर जाकर वोट मांगे। ऐसे में अगर वे मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जाते हैं तो जनता खुद को ठगा हुआ महसूस करेगी।
जेडीयू कार्यालय में कुछ कार्यकर्ताओं ने आक्रोश जताते हुए टेबल तक पलट दी और नारेबाजी की। इससे साफ है कि पार्टी दो गुटों में बंटती नजर आ रही है।
वहीं नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा लोकतंत्र को कमजोर कर रही है और जो भी भाजपा का मुख्यमंत्री बनेगा, वह “रबर स्टैंप” होगा। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के साथ सहानुभूति है और उनके स्वस्थ भविष्य की कामना करते हैं। साथ ही आरोप लगाया कि 2025-30 फिर से नीतीश का नारा देने के बावजूद उन्हें किनारे किया जा रहा है।
राजद सांसद Sudhakar Singh ने भी मिश्रित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विकास के मुद्दों पर उनका और नीतीश कुमार का मतभेद हमेशा रहा, खासकर 2006 में कृषि मंडियों को समाप्त करने के फैसले पर। उनका मानना है कि उस निर्णय से किसानों को नुकसान हुआ।
फिर भी व्यक्तिगत स्तर पर उन्होंने नीतीश कुमार के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि राजनीति में कई बार परिस्थितियां व्यक्ति को ऐसे मोड़ पर ला खड़ा करती हैं, जहां फैसलों के पीछे केवल व्यक्तिगत इच्छा नहीं बल्कि दबाव भी शामिल होते हैं।नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना सिर्फ एक पद परिवर्तन नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में नए समीकरणों की शुरुआत माना जा रहा है।









