मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच दुनिया पर मंडराया तेल संकट, भारत के पास सिर्फ 25 दिन का स्टॉक—रूस की एंट्री से बदले समीकरण

तेल पर छिड़ी ‘समुद्री जंग’! भारत के लिए पुतिन का बड़ा फैसला, चीन के जहाजों के लिए ईरान ने अचानक खोल दिया होर्मुज का रास्ता

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच दुनिया के सामने अब तेल संकट का खतरा भी मंडराने लगा है। Iran और United States के बीच बढ़ते टकराव का असर वैश्विक तेल सप्लाई पर पड़ने लगा है। इस संकट की चपेट में India भी आ सकता है, क्योंकि देश के पास फिलहाल करीब 25 दिनों का कच्चे तेल का स्टॉक ही बचा बताया जा रहा है।

इसी बीच भारत के पुराने सहयोगी Russia ने एक बार फिर मदद का हाथ बढ़ाया है। रूसी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि अगर मिडिल ईस्ट से तेल सप्लाई में बाधा आती है, तो रूस भारत को अतिरिक्त क्रूड ऑयल सप्लाई देने के लिए तैयार है।

होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ा खतरा

दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक Strait of Hormuz इस समय वैश्विक चिंता का केंद्र बना हुआ है। भारत का लगभग 40% कच्चा तेल इसी समुद्री रास्ते से होकर आता है।

मौजूदा हालात में मिडिल ईस्ट में कई भारतीय जहाज भी फंसे हुए बताए जा रहे हैं। ऐसे में अगर इस रास्ते पर संकट गहराता है, तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ सकता है।

भारत के लिए रूस तैयार

समाचार एजेंसी Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने साफ संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर वह भारत को तेल सप्लाई का रास्ता बदलकर भी मदद करने को तैयार है।

बताया जा रहा है कि करीब 9.5 मिलियन बैरल रूसी कच्चा तेल पहले से ही भारतीय जलक्षेत्र के पास जहाजों में मौजूद है, जिसे जरूरत पड़ने पर कुछ ही हफ्तों में भारतीय रिफाइनरियों तक पहुंचाया जा सकता है।

चीन के लिए ईरान ने खोला समुद्री रास्ता

इस बीच एक और दिलचस्प घटनाक्रम सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक China जाने वाले जहाजों के लिए ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट का रास्ता खुला रखा है

ब्लूमबर्ग और शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार एक बल्क कैरियर ने हाल ही में अपने डेस्टिनेशन सिग्नल को बदलकर “चाइना ओनर” कर दिया, जिससे संकेत मिलता है कि युद्ध के बीच भी चीन के जहाज सुरक्षित रास्ता तलाश रहे हैं।

तेल बाजार में उछाल

मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक तेल बाजार में भी उछाल देखा गया है। WTI Crude Oil फ्यूचर्स में गुरुवार को 3% से ज्यादा बढ़त दर्ज की गई और कीमत करीब 77 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।

बढ़ सकता है युद्ध

हालात इसलिए भी गंभीर माने जा रहे हैं क्योंकि हाल ही में एक अमेरिकी पनडुब्बी ने श्रीलंका के पास एक ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया। इसके बाद आशंका जताई जा रही है कि ईरान और अमेरिका के बीच टकराव और तेज हो सकता है

ऐसे में अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह संघर्ष सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित रहेगा, या फिर वैश्विक ऊर्जा संकट और बड़े भू-राजनीतिक टकराव का रूप ले लेगा।

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