पटना। पटना के फुलवारीशरीफ में आंतकी साजिश का खुलासा हुआ है। खुलासा हुआ है कि 2047 तक भारत को इस्लामी राष्ट्र बनाने की साजिश चल रही थी। पटना पुलिस ने प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के ठीक एक दिन पहले ही आतंकी को गिरफ्तार कर उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया था। इस मामले में पटना के एसएसपी ने गुरुपार को प्रेस कांफ्रेस कर पूरे साजिश का खुलासा किया, लेकिन मीडिया को जानकारी देते-देते एसएसपी मानवजीत सिंह ढिल्लों की जुबान फिसल गयी और उन्होंने आतंकी संगठन की तुलना आरएसएस से कर दी। अब इस मामले में एसएसपी मानवजीत सिंह की मुश्किलें बढ़ गयी है।

भाजपा ने इस मामले में एसएसपी को निशाने पर लिया है, वहीं राज्य सरकार ने 48 के भीतर एसएसपी से जवाब तलब करते हुए रिपोर्ट मांगी है। मानवजीत सिंह ढिल्लों ने मार्शल आर्ट और शारीरिक प्रशिक्षण देने की आड़ में चल रहे प्रतिबंधित संगठन पीएफआइ (पापुलर फ्रंट आफ इंडिया) की तुलना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से कर दी। उन्होंने कहा कि जिस तरह आरएसएस की शाखा में स्वयं सेवकों को शारीरिक प्रशिक्षण दिया जाता है, उसी तरह पकड़े गए संदिग्धों को भी ट्रेनिंग दी जाती थी। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसपर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए एसएसपी को मानसिक रूप से दिवालिया तथा जिहादियों का समर्थक (BJP Terms Patna SSP as Supporters of Jehadis) करार दिया है। हालांकि, एसएसपी के अनुसार, उनके बयान का गलत अर्थ निकाला जा रहा है। राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी ने एसएसपी से माफी मांगने को कहा है।

एसएसपी से 48 घंटे में मागा PHQ ने जवाब

ADG पुलिस मुख्यालय जितेंद्र सिंह गंगवार ने पटना SSP मानवजीत सिंह ढिल्लो को उनके विवादास्पद बयान को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया है. नोटिस के माध्यम से ADG पुलिस मुख्यालय जितेंद्र सिंह गंगवार ने SSP से पूछा आखिरी ऐसा बयान क्यों दिया, इसका जवाब 48 घंटे के भीतर दें.

क्या कहा था एसएसपी ने

एसएसपी मानवजीत ने कहा कि फुलवारीशरी
फ के एक मकान में एसडीआइपी और पीएफआइ की आड़ में ट्रेनिंग देने की जानकारी पुलिस को मिली थी। छह से सात जुलाई को केरल और तमिलनाडु दस से 12 लोग आए थे, जिन्हें ट्रेनिंग के साथ शारीरिक प्रशिक्षण दिया गया था। इस इनपुट के आधार पर छापेमारी की गई तो इसमें भारत विरोधी गतिविधियों की जानकारी मिली। उन्होंने कहा कि मामले में तीन की गिरफ्तारी की गई है। 26 लोगों पर नामजद एफआइआर है, जिसमें ज्यादातर बिहार के हैं। जांच में पता चला है कि यह लोग मस्जिद और मदरसे में युवाओं को ट्रेनिंग देते थे। ये लोग आरएसएस की शाखा की तरह प्रशिक्षण देते थे। इस दौरान युवाओं का ब्रेनवाश करते थे।

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